मेड इन इंडिया मशीनों की पहली खेप न्यूजीलैंड रवाना हुई। पीयूष गोयल ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसरों से जोड़ा।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 20 अक्टूबर। महाराष्ट्र के पुणे में बनी JCB मशीनों का न्यूजीलैंड को निर्यात शुरू हो गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मशीनों की पहली खेप को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने इस उपलब्धि पर महाराष्ट्र सरकार और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को बधाई दी। गोयल के मुताबिक, ये मशीनें भारत में ही डिजाइन और निर्मित की गई हैं और अब दुनिया के 140 देशों में भेजी जा रही हैं।
भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते से नए अवसरों की उम्मीद
पीयूष गोयल ने कहा कि न्यूजीलैंड को JCB मशीनों का निर्यात केवल शुरुआत है और भारत को इस दिशा में अभी बहुत काम करना है। उन्होंने भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का जिक्र करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच कारोबार और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है।
गोयल ने दावा किया कि इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा। उन्होंने कहा कि समझौते से दोनों देशों को एक-दूसरे की तकनीक का लाभ मिल सकता है। साथ ही, किसानों की आय बढ़ाने और न्यूजीलैंड में पढ़ाई करने जाने वाले भारतीय युवाओं के लिए काम के अवसरों से जुड़े लाभों की भी उम्मीद जताई।
पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरें

केंद्रीय मंत्री ने अपने एक्स अकाउंट पर JCB मशीनों की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि न्यूजीलैंड अब भारत में बनी JCB मशीनों का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने पुणे में निर्मित मशीनों के पहले निर्यात को भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए अहम अवसर बताया।
गोयल ने वीडियो साझा करते हुए भी कहा कि महाराष्ट्र में इंजीनियरिंग, डिजाइन और निर्माण के बाद तैयार की गई JCB मशीनें अब न्यूजीलैंड पहुंच रही हैं।
दूसरे देशों के साथ व्यापार बढ़ाने पर जोर
भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों के बीच इस निर्यात को विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। भारत यूरोपीय संघ के साथ भी मुक्त व्यापार समझौते पर काम कर रहा है, जबकि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर भी चर्चा जारी है।
महाराष्ट्र में बनी JCB मशीनों की न्यूजीलैंड को पहली खेप भारत के विनिर्माण उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल है।
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