तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी के बीच हुई बैठक, परिसीमन विधेयक समेत कई मुद्दों पर चर्चा की जानकारी
Rahul Gupta
मुंबई, 12 सितंबर।
राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी गठबंधन INDIA के भीतर सियासी हलचल उस समय बढ़ गई, जब डीएमके की प्रमुख नेता और लोकसभा सांसद कनिमोझी करुणानिधि अचानक मुंबई स्थित मातोश्री पहुंचीं और शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। तमिलनाडु की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाली डीएमके की वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के प्रमुख क्षेत्रीय नेता के बीच हुई इस मुलाकात को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस से डीएमके की बढ़ती नाराजगी
तमिलनाडु के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव बढ़ा है। कांग्रेस ने तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है। इसके बाद दोनों दलों के करीब दो दशक पुराने गठबंधन में दरार की स्थिति बन गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्षेत्रीय दल वीसीके के प्रमुख थिरुमावलवण को फोन कर टीवीके का समर्थन करने का अनुरोध भी किया था। कांग्रेस के इस रुख से नाराज डीएमके सांसद कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में डीएमके सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया।
अब तक डीएमके सांसद लोकसभा में राहुल गांधी और कांग्रेस सांसदों के पास बैठते रहे हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके का खुलकर समर्थन किया है। कनिमोझी ने इसके लिए अखिलेश यादव का आभार भी जताया।
मातोश्री में परिसीमन विधेयक पर चर्चा
इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच कनिमोझी का मातोश्री पहुंचना काफी अहम माना जा रहा है। बैठक के दौरान शिवसेना यूबीटी के सांसद अनिल देसाई और विधायक मिलिंद नार्वेकर भी मौजूद रहे।
मिलिंद नार्वेकर के मुताबिक, बैठक में केंद्र सरकार की ओर से लाए जा रहे निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन विधेयक पर चर्चा हुई। इसमें लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव बताया गया है।
क्षेत्रीय दलों के बीच बढ़ रही बातचीत
परिसीमन के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे का रुख रहा है कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जाना चाहिए, लेकिन निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन जैसे राष्ट्रीय विषय पर जल्दबाजी करने के बजाय व्यापक राष्ट्रीय चर्चा और अध्ययन जरूरी है।
मुलाकात के बाद शिवसेना ठाकरे गुट के सांसद अनिल देसाई ने इसे बेहद सौहार्दपूर्ण बैठक बताया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में डीएमके और महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी दोनों ही अपने-अपने राज्यों की महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्तियां हैं।
कांग्रेस के साथ डीएमके की बढ़ती दूरी और दो बड़े क्षेत्रीय दलों के नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात ने INDIA गठबंधन के भविष्य और राष्ट्रीय राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
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