क्राइम ब्रांच ने 900 एटीएम कार्ड, 167 सिम कार्ड, 88 पासबुक और 143 चेकबुक समेत डिजिटल सामान बरामद किया, 24 करोड़ के लेन-देन का पता चला
Rahul Gupta
मुंबई, 11 सितंबर।
मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट-5 ने ऑनलाइन साइबर फ्रॉड करने वाले एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क के जरिए 350 करोड़ रुपये से ज्यादा के साइबर फ्रॉड का कनेक्शन हो सकता है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को 19 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अलग-अलग बैंकों में अपने नाम और दूसरे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों से बड़ी संख्या में मोबाइल सिम कार्ड लिंक किए जाते थे। साइबर ठगी से हासिल रकम इन्हीं खातों में मंगाने के बाद अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।
900 एटीएम कार्ड और 167 सिम बरामद
क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के पास से बड़ी संख्या में बैंकिंग और डिजिटल सामान बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से 88 पासबुक, 143 चेकबुक, 900 एटीएम कार्ड, 24 मोबाइल फोन, 167 सिम कार्ड और 2 लैपटॉप मिले हैं।
जांच में करीब 10 बैंक खातों के जरिए 24 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़े पैसों के लेन-देन का पता चला है। इन बैंक खातों से जुड़े 1,930 साइबर पोर्टल रिकॉर्ड की जांच में 32 शिकायतें भी सामने आई हैं।
288 सिम कार्ड का साइबर फ्रॉड से कनेक्शन
तकनीकी जांच के दौरान आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए 288 सिम कार्ड का साइबर फ्रॉड से कनेक्शन सामने आया है। क्राइम ब्रांच अब इन मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क में साइबर ठगी के कई तरीके इस्तेमाल किए जाते थे। इनमें ओटीपी फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, नौकरी के नाम पर ठगी और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे मामले शामिल हैं।
आरोपियों की प्रोफाइल भी जांच के दायरे में
गिरफ्तार आरोपियों की व्यक्तिगत और आपराधिक पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है। इनमें एक आरोपी कैब ड्राइवर है। दूसरे आरोपी की उम्र 44 साल है और उसने नौवीं कक्षा तक पढ़ाई की है। तीसरे आरोपी ने 12वीं के बाद दो साल तक कॉलेज में पढ़ाई की है।
क्राइम ब्रांच यह पता लगाने में जुटी है कि तीनों आरोपी इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क से किस तरह जुड़े और इनके जरिए कितने बैंक खातों तथा मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया।
महाराष्ट्र से बाहर भी नेटवर्क होने का शक
पुलिस को शक है कि साइबर फ्रॉड के इस नेटवर्क के तार महाराष्ट्र के बाहर दूसरे राज्यों और संभवतः विदेशों तक भी जुड़े हो सकते हैं। इसी दिशा में जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
फिलहाल क्राइम ब्रांच बैंक खातों में हुए लेन-देन, मोबाइल नंबरों, सिम कार्ड और साइबर पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ साइबर फ्रॉड से जुड़े और मामलों का खुलासा हो सकता है।
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