मराठा आरक्षण की मांग को लेकर सातवें दिन भी जारी रहा जरांगे का अनशन; बोले- मांग पूरी होने तक पीछे नहीं हटूंगा, महायुति से दूर हो सकता है मराठा समुदाय
Rahul Gupta
जालना, 5 सितंबर।
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शुक्रवार को साफ कहा कि जब तक पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग पूरी नहीं होती, तब तक वह अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर उनका अनशन शुक्रवार को सातवें दिन भी जारी रहा।
जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान जरांगे ने महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार को नया अल्टीमेटम दिया। उन्होंने मांग की कि पात्र मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में सरकार 12 सितंबर तक शासनादेश यानी जीआर जारी करे। उन्होंने बताया कि 12 सितंबर को गांव में मराठा समुदाय की बैठक आयोजित की जाएगी।
छगन भुजबल पर जरांगे का निशाना
मनोज जरांगे ने अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी कोटे से मराठों को आरक्षण देने का विरोध कर रहे वरिष्ठ ओबीसी नेता और महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल पर भी निशाना साधा।
जरांगे ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उम्र के साथ समझदारी आएगी, लेकिन बुजुर्ग होने के बाद भी भुजबल के रुख में कोई बदलाव नहीं आया। उन्होंने मराठों को ओबीसी कोटे से आरक्षण देने के अपने रुख को दोहराते हुए भुजबल की भूमिका पर सवाल उठाए।
बोले- महायुति से दूर हो सकता है मराठा समुदाय
जरांगे ने चेतावनी दी कि अगर मराठा आरक्षण के मुद्दे पर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो मराठा समुदाय महायुति से दूर हो सकता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या महायुति के पीछे सिर्फ छगन भुजबल के वोट हैं।
उन्होंने कहा कि मराठों को आरक्षण देने से ओबीसी समुदाय को किसी तरह का खतरा नहीं होगा। जरांगे ने धनगर समुदाय की अनुसूचित जनजाति यानी एसटी आरक्षण की मांग का भी समर्थन किया।
उन्होंने राज्य सरकार की ओर से हाल में गठित मराठा प्रकोष्ठ और इस मुद्दे से निपटने के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाया। जरांगे ने पूछा कि इन व्यवस्थाओं से मराठा आरक्षण का स्थायी समाधान कैसे निकलेगा।
सरकार को दिया था तीन साल का समय
मनोज जरांगे ने कहा कि सरकार को उनकी मांगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मराठा समुदाय ने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए तीन साल का समय दिया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा और सरकार को मांगों पर ठोस कदम उठाना होगा। कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में शासनादेश जारी करना उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
हैदराबाद स्टेट गजट लागू करने की मांग
जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार से हैदराबाद स्टेट गजट लागू करने की भी मांग की। उनके अनुसार, इसमें मराठा परिवारों को कृषक समुदाय कुनबी के रूप में पहचाने जाने संबंधी रिकॉर्ड मौजूद हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि गजट के आधार पर जारी होने वाले जाति प्रमाणपत्रों के लिए जाति सत्यापन की प्रक्रिया किस तरह की होगी।
कुनबी एक कृषि समुदाय है, जो ओबीसी श्रेणी में आता है और सरकारी नौकरियों तथा शिक्षा में आरक्षण का लाभ प्राप्त करता है। मनोज जरांगे पात्र मराठों के लिए कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ मिल सके।
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