कोर्ट में पेशी से राहत मांगना मेयर रितु तावड़े को पड़ा भारी, लगा ₹1,000 का जुर्माना

10 साल पुराने मारपीट मामले में अगली सुनवाई पर पेश होना जरूरी, गैरहाजिरी पर वारंट और जमानत बॉन्ड रद्द करने की चेतावनी

 

राहुल गुप्ता

मुंबई, 8 अक्टूबर। मुंबई की मेयर रितु तावड़े को 10 साल पुराने मारपीट के मामले में कोर्ट में पेशी से छूट मांगना महंगा पड़ गया। बार-बार गैरहाजिर रहने पर सेशंस कोर्ट ने बुधवार को उन पर ₹1,000 का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने साफ चेतावनी दी कि 2 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में अगर वह पेश नहीं होती हैं, तो वारंट जारी किया जा सकता है और जमानत बॉन्ड रद्द किए जा सकते हैं।

एडिशनल सेशंस जज जी.जी. भंसाली ने कहा कि यह मामला 2016 का है, जबकि चार्जशीट 2017 में दाखिल हो चुकी थी और 2019 में मामला ट्रायल के लिए सेशंस कोर्ट पहुंच गया था। इसके बावजूद अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं। कोर्ट ने आरोपियों की लगातार गैरहाजिरी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इससे मुकदमे को लंबा खींचने की स्थिति बन रही है। आरोप नवंबर के पहले सप्ताह में तय किए जाने की संभावना है।

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मेयर की व्यस्तता का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान तावड़े की वकील दुर्गा राजपूत ने व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग करते हुए कहा कि मेयर मुंबई की ‘प्रथम नागरिक’ हैं और बीएमसी के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी जरूरी होती है। दो अन्य आरोपियों ने भी खुद को समाजसेवक बताते हुए अपने व्यस्त कार्यक्रम का हवाला दिया।

अतिरिक्त सरकारी वकील इकबाल सोलकर ने छूट की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मामला कई साल पुराना है और आरोपी जानबूझकर कोर्ट में पेश होने से बच रहे हैं। इससे पहले 23 सितंबर की सुनवाई में भी तावड़े की पेशी से छूट की अर्जी मंजूर करते हुए ₹300 का जुर्माना लगाया गया था।

2 नवंबर को हर हाल में पेशी

कोर्ट ने इस बार छूट की अर्जी मंजूर कर ली, लेकिन तावड़े और दो अन्य आरोपियों पर ₹1,000 का खर्च लगाया। तावड़े को यह रकम आदेश के एक सप्ताह के भीतर सरकारी खजाने में जमा करनी होगी।

जज ने निर्देश दिया कि 2 नवंबर को आरोप तय करने की प्रक्रिया के दौरान तीनों आरोपियों की मौजूदगी जरूरी है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगली तारीख पर पेश नहीं होने की स्थिति में वारंट जारी किया जा सकता है और जमानत बॉन्ड रद्द किए जा सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोप तय होने के बाद आरोपी स्थायी पेशी से छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं।

2016 में स्कूल में हुआ था विवाद

मामला 29 जुलाई 2016 का है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, वकोला इलाके में बीएमसी के उर्दू माध्यम स्कूल में उस समय कॉर्पोरेटर रितु तावड़े समेत 7 लोग पहुंचे थे। यहां कैंसर से पीड़ित एक शिक्षक के तबादले को लेकर स्कूल प्रबंधन के साथ विवाद हुआ था।

पुलिस के अनुसार, विवाद के दौरान स्कूल प्रबंधन के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई और दो अन्य शिक्षकों के साथ मारपीट की गई। इस मामले में 11 अगस्त 2016 को एफआईआर दर्ज की गई थी।

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