प्रत्यक्ष सर्वेक्षण से लेकर सदनिका का कब्जा सौंपने तक पुनर्वास के महत्वपूर्ण चरण अब एक ही एकीकृत डिजिटल प्रणाली पर
आधार आधारित OVSE प्रणाली, बिजली बिल का ऑनलाइन सत्यापन और कम्प्यूटरीकृत ई-लॉटरी से लाभार्थियों की सटीक पहचान तथा सदनिका आवंटन में अधिक पारदर्शिता
कम्प्यूटरीकृत सदनिका आवंटन कक्ष के माध्यम से उपलब्ध सदनिकाओं, आवंटन और कब्जा प्रक्रिया का डिजिटल प्रबंधन; पुनर्वास मामलों की निगरानी होगी अधिक सुगम
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 2 अक्टूबर। परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (PAP) की पुनर्वास प्रक्रिया में महत्वपूर्ण डिजिटल परिवर्तन लाते हुए मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने पुनर्वास प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरणों को अलग-अलग और मुख्यतः मैनुअल रिकॉर्ड से एक संरचित, प्रौद्योगिकी-आधारित और एकीकृत डिजिटल प्रणाली पर लाया है।
एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी, भा.प्र.से. के हाथों, अतिरिक्त महानगर आयुक्त-1 श्री वेलरासू, भा.प्र.से. तथा सह महानगर आयुक्त श्री पंकज देवरे, भा.प्र.से. की उपस्थिति में आज कम्प्यूटरीकृत सदनिका आवंटन कक्ष तथा पुनर्वास एवं पुनर्वसाहत(R&R) प्रणाली — ‘ई-पुनर्वसन’ को कार्यान्वित किया गया। साथ ही गरीब नगर के 94 पात्र झोपड़ीधारकों को कब्जा पत्र प्रदान किए गए।
‘ई-पुनर्वसन’ के माध्यम से प्रत्यक्ष सर्वेक्षण से लेकर सदनिका का कब्जा प्राप्त करने तक की पुनर्वास प्रक्रिया को डिजिटल रूप से जोड़ा गया है। इसमें मोबाइल ऐप के माध्यम से सर्वेक्षण, आधार OVSE सत्यापन, बिजली बिल का ऑनलाइन सत्यापन, पात्रता से संबंधित प्रक्रियाएं, कम्प्यूटरीकृत ई-लॉटरी, आधार OVSE सत्यापन के माध्यम से सदनिका आवंटन, आवंटन पत्र और कब्जा पत्र जारी करना तथा उसके बाद डिजिटल निगरानी शामिल है।
यह परिवर्तन केवल रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में लाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य पूरी पुनर्वास प्रक्रिया को केंद्रीकृत और ट्रैक करने योग्य बनाना, लाभार्थियों की पहचान को अधिक प्रभावी ढंग से सत्यापित करना, सदनिका चयन में मैनुअल रिकॉर्ड तथा मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भरता कम करना और परियोजना प्रभावितों के मामलों तथा उपलब्ध पुनर्वास सदनिकाओं की स्पष्ट डिजिटल जानकारी एमएमआरडीए को उपलब्ध कराना है।
मैनुअल प्रक्रिया से एकीकृत डिजिटल प्रणाली की ओर
R&R एप्लिकेशन के कार्यान्वित होने से पहले परियोजना प्रभावितों की पुनर्वास प्रक्रिया के विभिन्न चरण मुख्यतः मैनुअल थे और अलग-अलग एक्सेल रिकॉर्ड पर निर्भर थे।
सर्वेक्षण एजेंसी द्वारा प्रत्यक्ष स्थल पर जाकर परियोजना प्रभावितों की जानकारी एकत्र की जाती थी। आधार कार्ड, बिजली बिल और अन्य सहायक दस्तावेजों का सत्यापन भी मैनुअल रूप से किया जाता था। इस प्रक्रिया में एकत्र की गई बेसलाइन सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण (BSES) की जानकारी बाद में एक्सेल प्रारूप में प्रस्तुत की जाती थी। इसके बाद संयुक्त सत्यापन और परिशिष्ट-II (Annexure II) तैयार करने की प्रक्रिया मैनुअल रूप से होती थी। उपलब्ध पुनर्वास सदनिकाओं का रिकॉर्ड भी एक्सेल में अलग से रखा जाता था। इसी प्रकार लॉटरी, सदनिका आवंटन तथा आवंटन पत्र और कब्जा पत्र तैयार करने की प्रक्रिया भी मैनुअल थी।
पूर्व प्रक्रिया:
मैनुअल सर्वेक्षण एवं दस्तावेज → मैनुअल सत्यापन → संयुक्त सत्यापन → परिशिष्ट-II → सदनिका आवंटन प्रक्रिया → आवंटन पत्र → कब्जा पत्र
विभिन्न चरणों पर अलग-अलग रिकॉर्ड के माध्यम से जानकारी संभालनी पड़ती थी, जिसके कारण बड़े पैमाने पर मैनुअल प्रक्रिया तथा जानकारी का मिलान करना पड़ता था।
‘ई-पुनर्वसन’ से पुनर्वास प्रक्रिया कैसे बदलेगी?
नई डिजिटल R&R प्रणाली के माध्यम से मोबाइल आधारित ई-सर्वेक्षण द्वारा प्रत्यक्ष क्षेत्र से ही परियोजना प्रभावितों की जानकारी दर्ज की जा सकेगी। परियोजना प्रभावितों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार OVSE सत्यापन तथा बिजली सेवा प्रदाताओं के साथ डिजिटल जुड़ाव के माध्यम से बिजली बिलों का ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा। संयुक्त सत्यापन और परिशिष्ट-II के चरणों को भी डिजिटल प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
लागू पात्रता प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र परियोजना प्रभावितों के लिए पारदर्शी कम्प्यूटरीकृत ई-लॉटरी आयोजित की जाएगी। इसके बाद आधार OVSE सत्यापन के माध्यम से आवंटन पत्र और कब्जा पत्र की प्रक्रिया डिजिटल रूप से की जाएगी।
नई डिजिटल प्रक्रिया:
मोबाइल ई-सर्वेक्षण → आधार OVSE सत्यापन → बिजली बिल का ऑनलाइन सत्यापन → संयुक्त सत्यापन → परिशिष्ट-II → पारदर्शी कम्प्यूटरीकृत ई-लॉटरी → आधार OVSE सत्यापन के माध्यम से डिजिटल आवंटन पत्र → डिजिटल कब्जा पत्र → डिजिटल निगरानी और पुनर्वास के बाद की कार्यवाही
इससे परियोजना प्रभावितों के पुनर्वास मामलों के महत्वपूर्ण चरण अलग-अलग मैनुअल रिकॉर्ड के बजाय एक एकीकृत डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से पूरे किए जा सकेंगे।
परियोजना प्रभावितों की पहचान का सत्यापन कैसे होगा?
इस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक आधार OVSE — Offline Verification Seeking Entity आधारित सत्यापन है।
UIDAI द्वारा विकसित इस OVSE सत्यापन प्रक्रिया का उपयोग करने वाली एमएमआरडीए देश की पहली संस्था है। इस व्यवस्था के माध्यम से परियोजना प्रभावितों द्वारा दी गई आधार से संबंधित जानकारी का ऑफलाइन तरीके से पहचान सत्यापन किया जा सकता है। इससे लाभार्थी की पहचान अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने और संबंधित पुनर्वास मामले के साथ सही लाभार्थी को जोड़ने में सहायता मिलेगी।
‘ई-पुनर्वसन’ में आधार OVSE परियोजना प्रभावितों की पहचान सत्यापित करने के लिए एक अतिरिक्त डिजिटल स्तर उपलब्ध कराता है। इसके अलावा लाभार्थी के अंगूठे के निशान और प्रत्यक्ष तस्वीर को दर्ज करने की भी व्यवस्था है। इससे पहचान सत्यापन प्रक्रिया और अधिक मजबूत होगी।
बिजली बिल का ऑनलाइन सत्यापन — पहचान सुनिश्चित करने का एक और स्तर
लाभार्थी का सत्यापन केवल आधार पर निर्भर नहीं रहेगा।
‘ई-पुनर्वसन’ प्रणाली में बिजली सेवा प्रदाताओं के माध्यम से पुराने बिजली बिलों का ऑनलाइन सत्यापन करने की सुविधा है। इससे परियोजना प्रभावितों द्वारा प्रस्तुत संबंधित पुराने रिकॉर्ड की डिजिटल तरीके से पुष्टि की जा सकेगी।
आधार OVSE, संयुक्त सत्यापन और परिशिष्ट-II के साथ यह प्रक्रिया सदनिका आवंटन से पहले लाभार्थियों का अधिक संरचित तरीके से सत्यापन करने में सहायता करेगी।
कम्प्यूटरीकृत ई-लॉटरी के माध्यम से पारदर्शी सदनिका चयन
‘ई-पुनर्वसन’ की एक महत्वपूर्ण विशेषता सदनिका आवंटन के लिए कम्प्यूटरीकृत ई-लॉटरी है।
आवश्यक पात्रता प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपलब्ध सदनिकाओं में से पुनर्वास के लिए सदनिका का चयन यादृच्छिक कम्प्यूटरीकृत प्रक्रिया से और बिना मानवीय हस्तक्षेप के किया जाएगा।
इससे वास्तविक सदनिका चयन प्रक्रिया में विवेकाधिकार समाप्त होगा और आवंटन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रणाली-आधारित होगी।
ई-लॉटरी के बाद आवंटन पत्र और उसके बाद कब्जा पत्र तैयार कर डिजिटल तरीके से वितरित किया जाएगा। इन दस्तावेजों को QR कोड से जोड़ने तथा अंगूठे का निशान और प्रत्यक्ष तस्वीर दर्ज करने की सुविधा भी प्रणाली में उपलब्ध है।
डिजिटल सदनिका रिकॉर्ड — उपलब्ध, आवंटित और कब्जा दी गई सदनिकाओं की स्पष्ट जानकारी
नई प्रणाली के माध्यम से पुनर्वास के एक और महत्वपूर्ण पहलू — एमएमआरडीए की पुनर्वास सदनिकाओं के रिकॉर्ड — का डिजिटल प्रबंधन किया जाएगा।
पहले सदनिकाओं का रिकॉर्ड एक्सेल में मैनुअल रूप से रखा जाता था। अब ‘ई-पुनर्वसन’ के अंतर्गत डिजिटल सदनिका रिकॉर्ड प्रणाली के माध्यम से एमएमआरडीए की पुनर्वास इमारतों और सदनिकाओं का प्रबंधन किया जाएगा।
इससे कितनी सदनिकाएं उपलब्ध हैं, कितनी सदनिकाएं परियोजना प्रभावितों को आवंटित की गई हैं और कितनी सदनिकाओं का कब्जा दिया गया है, इसकी संरचित जानकारी उपलब्ध होगी। परिणामस्वरूप सदनिका प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा तथा दोहरी प्रविष्टियों, गलत आवंटन या अनधिकृत व्यक्तियों को सदनिका आवंटित होने की संभावना कम करने में सहायता मिलेगी।
परियोजना प्रभावितों की केंद्रीकृत जानकारी और मामलों की डिजिटल ट्रैकिंग
‘ई-पुनर्वसन’ के माध्यम से परियोजना प्रभावितों की जानकारी को अधिक केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली पर लाए जाने से प्रत्येक पुनर्वास मामले की विभिन्न चरणों में प्रगति आसानी से देखी जा सकेगी।
इस प्रणाली में MIS रिपोर्ट और प्रबंधन डैशबोर्ड उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से एमएमआरडीए परियोजना प्रभावितों के सदनिका आवंटन की स्थिति, पुनर्वास की प्रगति तथा प्रत्येक मामला वर्तमान में किस चरण में है, इसकी निगरानी कर सकेगा।
कब्जा दिए जाने के बाद की पुनर्वास संबंधी कार्यवाही का भी डिजिटल रिकॉर्ड रखने का प्रावधान है। इससे संपूर्ण पुनर्वास प्रक्रिया का अधिक संरचित प्रबंधन किया जा सकेगा।
इस प्रकार ‘ई-पुनर्वसन’ केवल लॉटरी या सदनिका आवंटन के लिए कम्प्यूटरीकृत प्रणाली नहीं है, बल्कि परियोजना प्रभावितों के प्रारंभिक सर्वेक्षण, सत्यापन, सदनिका आवंटन, कब्जा और उसके बाद की निगरानी तक संपूर्ण पुनर्वास प्रक्रिया का एकीकृत डिजिटल प्रबंधन करने वाली प्रणाली है।
परियोजना प्रभावितों के लिए ‘ई-पुनर्वसन’ का वास्तविक अर्थ क्या है?
परियोजना प्रभावितों के दृष्टिकोण से इस नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अधिक पारदर्शिता, प्रक्रिया की स्पष्ट ट्रैकिंग और अधिक संरचित पुनर्वास व्यवस्था है।
अलग-अलग मैनुअल और एक्सेल रिकॉर्ड के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी संभालने के बजाय अब पुनर्वास के प्रमुख चरण डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े होंगे। आधार OVSE और बिजली बिल के ऑनलाइन सत्यापन से लाभार्थियों की पहचान अधिक प्रभावी रूप से सुनिश्चित की जा सकेगी। सदनिका का चयन यादृच्छिक कम्प्यूटरीकृत ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। आवंटन और कब्जा प्रक्रिया डिजिटल होगी, जबकि MIS और प्रबंधन डैशबोर्ड के माध्यम से पुनर्वास मामलों की स्थिति और सदनिकाओं की उपलब्धता देखी जा सकेगी।
इस प्रणाली से परियोजना प्रभावितों की केंद्रीकृत जानकारी, अधिक मजबूत लाभार्थी सत्यापन, बिना मानवीय हस्तक्षेप के पारदर्शी और यादृच्छिक सदनिका आवंटन, सदनिकाओं का डिजिटल प्रबंधन, पुनर्वास मामलों की अधिक प्रभावी ट्रैकिंग तथा प्रबंधन स्तर पर पुनर्वास की प्रगति की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी।
इन सभी उपायों के माध्यम से बिखरे हुए मैनुअल रिकॉर्ड के कारण उत्पन्न हो सकने वाली त्रुटियों को कम करते हुए पुनर्वास प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, ट्रैक करने योग्य, कार्यक्षम और प्रौद्योगिकी-आधारित बनाने का एमएमआरडीए का प्रयास है।
इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री. देवेंद्र फडणवीस ने कहा:
“प्रौद्योगिकी का वास्तविक उपयोग तभी सिद्ध होता है, जब वह प्रशासन को अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सहज रूप से उपलब्ध बनाती है। ‘ई-पुनर्वसन’ के माध्यम से परियोजना प्रभावितों के सत्यापन से लेकर सदनिका आवंटन और कब्जा देने तक की प्रक्रिया को डिजिटल और ट्रैक करने योग्य बनाया गया है। महाराष्ट्र के विकास में परियोजना प्रभावितों का महत्वपूर्ण योगदान होता है और उनका पुनर्वास सम्मानपूर्वक, न्यायसंगत तरीके से और निश्चितता के साथ हो, यह सुनिश्चित करना भी हमारी जिम्मेदारी है। प्रौद्योगिकी के माध्यम से मानवीय हस्तक्षेप कम करके और पारदर्शिता को और मजबूत बनाकर एमएमआरडीए नागरिक-केंद्रित पुनर्वास के लिए अधिक सक्षम व्यवस्था तैयार कर रहा है।”
माननीय उपमुख्यमंत्री तथा अध्यक्ष, एमएमआरडीए, श्री. एकनाथ शिंदे ने कहा:
“परियोजना प्रभावितों को उनके अधिकार के पुनर्वास के लिए बिचौलियों पर निर्भर न रहना पड़े या अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। ‘ई-पुनर्वसन’ के माध्यम से एमएमआरडीए ने सत्यापन, पात्रता, कम्प्यूटरीकृत सदनिका आवंटन और कब्जा, इन सभी प्रक्रियाओं को एक संरचित डिजिटल व्यवस्था में लाया है। आधार आधारित सत्यापन, रिकॉर्ड का ऑनलाइन सत्यापन और कम्प्यूटरीकृत ई-लॉटरी से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और सदनिका चयन में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा। प्रत्येक पात्र परियोजना प्रभावित को उसके अधिकार का पुनर्वास स्पष्ट, न्यायसंगत और कार्यक्षम प्रक्रिया के माध्यम से मिले, यह हमारी प्राथमिकता है।”
डॉ. संजय मुखर्जी, भा.प्र.से. एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त ने कहा:
“पुनर्वास का अर्थ केवल सदनिका आवंटित करना नहीं है; बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक परियोजना प्रभावित व्यक्ति को उसका अधिकार न्यायसंगत, पारदर्शी और सम्मानजनक प्रक्रिया के माध्यम से मिले। ‘ई-पुनर्वसन’ के माध्यम से हम बिखरी हुई मैनुअल प्रक्रियाओं से एक एकीकृत डिजिटल प्रणाली की ओर बढ़ रहे हैं। इस व्यवस्था में लाभार्थियों की पहचान सत्यापित की जाएगी, प्रत्येक रिकॉर्ड को ट्रैक किया जा सकेगा और सदनिका का चयन बिना मानवीय हस्तक्षेप के कम्प्यूटरीकृत ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। प्रौद्योगिकी का अंतिम उद्देश्य नागरिकों के लिए प्रशासन को अधिक सरल बनाना होना चाहिए। परियोजना प्रभावितों को पुनर्वास प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता, विश्वास और बिचौलियों पर न्यूनतम निर्भरता रहे, इसी उद्देश्य से यह प्रणाली विकसित की गई है। हमारा प्रयास ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें पारदर्शिता कोई अतिरिक्त उपाय न होकर पूरी प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा हो।”
पढ़ने के लिए धन्यवाद
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