आम चुनाव के बाद भाजपा के सत्ता में आने के पहले ही वर्ष में दूसरी बार आचार संहिता लागू होने से मनपा का कामकाज प्रभावित होने के आसार, पार्षदों ने जताई नाराजगी
राहुल गुप्ता
नागपुर, 23 सितंबर।
नागपुर मनपा में चार साल के प्रशासक राज के बाद आम चुनाव में जीत दर्ज कर भाजपा सत्ता में आई, लेकिन पहले ही वर्ष के कार्यकाल में मंगलवार को दूसरी बार आचार संहिता लागू हो गई। इससे मनपा के कामकाज के साथ विकास कार्यों पर भी असर पड़ने के आसार हैं।
इससे पहले स्थानीय निकायों के तहत विधान परिषद सीट के चुनाव की घोषणा होने के कारण मनपा का बजट तय समय से करीब एक महीने देरी से पेश किया गया था। अब स्नातक सीट के लिए चुनाव की घोषणा होने के बाद एक बार फिर मनपा के कामकाज पर आचार संहिता का असर पड़ने की स्थिति बन गई है।
नागपुर में करीब डेढ़ महीने तक रहेगी परेशानी
चुनाव की घोषणा के साथ आचार संहिता लागू होने के बाद कई पार्षदों ने मनपा का कामकाज प्रभावित होने पर नाराजगी जताई है। पार्षदों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए निधि हासिल करने में पहले ही काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी।
कई प्रभागों के लिए निधि मिलने की प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि आचार संहिता लागू हो गई। ऐसे में प्रभागों में विकास कार्य शुरू करना मुश्किल होगा। पार्षदों के अनुसार, करीब डेढ़ महीने तक यह स्थिति रह सकती है। बारिश के बाद प्रभागों में सामने आई समस्याओं के समाधान के लिए भी विकास कार्य जरूरी थे।
चुनाव की जानकारी होने के बावजूद तैयारी पर उठे सवाल
स्थानीय निकाय और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद की दोनों सीटों के चुनाव पहले से तय माने जा रहे थे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, भाजपा को भी चुनावी कार्यक्रम की संभावित स्थिति की जानकारी थी।
इसके बावजूद मनपा में विकास कार्यों से जुड़ी फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाने के पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए। स्थायी समिति में विकास कार्यों की फाइलों की प्रक्रिया भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी।
पहले वर्ष के बजट को लागू करने में भी धीमी गति का आरोप लगाया जा रहा है। जानकारों के मुताबिक, कुछ पदाधिकारियों से जुड़ी निधि की फाइलें टेंडर प्रक्रिया तक पहुंच सकीं, लेकिन करीब 160 पार्षदों में से लगभग 150 पार्षदों के प्रभागों में विकास कार्यों की फाइलें टेंडर तक नहीं पहुंच पाईं।
अब आचार संहिता लागू होने के कारण इन लंबित विकास कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
पदाधिकारियों की सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित
चुनाव घोषित होने के बाद आदर्श आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करना मनपा प्रशासन की जिम्मेदारी है। प्रशासन के अनुसार, आचार संहिता के प्रभाव में पदाधिकारियों को मिलने वाली कुछ सुविधाओं और सेवाओं पर भी रोक या बदलाव लागू हो सकता है।
मंगलवार को चुनाव की जानकारी मिलते ही महापौर नीता ठाकरे, उपमहापौर लीला हाथीबेड, सत्ता पक्ष नेता बाल्या बोरकर और विपक्ष नेता संजय महाकालकर समेत अन्य पदाधिकारियों ने अपने सरकारी वाहन लौटा दिए।
सत्ता पक्ष नेता बाल्या बोरकर ने इससे पहले ही सरकारी वाहन लौटा दिया था। मंगलवार को निजी वाहन पर लगा सत्ता पक्ष नेता का बोर्ड और झंडा भी हटा दिया गया।
आचार संहिता लागू होने के बाद अब मनपा प्रशासन को चुनाव संबंधी नियमों के अनुसार कामकाज संचालित करना होगा। इसका सीधा असर नए विकास कार्यों और उनसे जुड़ी प्रक्रियाओं पर पड़ने की संभावना है।
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