आंबेडकर के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल बंद हो : धर्मपाल मेश्राम

नेहरू से डॉ. आंबेडकर की तुलना को बताया अनुचित

शिवाजी पार्क में अभिजीत दिपके के बयान पर जताई आपत्ति

नागपुर, 03 अक्टूबर। मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित सभा में अभिजीत दिपके द्वारा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और पंडित जवाहरलाल नेहरू के संदर्भ में दिए गए कथित बयानों को लेकर भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश के पूर्व उपाध्यक्ष एडवोकेट धर्मपाल मेश्राम ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। नागपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार परिषद में मेश्राम ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के योगदान और आंबेडकरी आंदोलन का उल्लेख करते समय ऐतिहासिक तथ्यों और संवैधानिक प्रक्रिया को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मतदान के अधिकार को लेकर संवैधानिक व्यवस्था का उल्लेख

दिपके के कथित बयान का संदर्भ देते हुए मेश्राम ने कहा कि भारत में नागरिकों को मतदान का अधिकार संविधान के तहत सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की व्यवस्था के माध्यम से मिला। संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार लोकसभा और विधानसभा चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होते हैं। देश में पहला आम चुनाव 1951-52 में हुआ था।

Advertisement

मेश्राम ने कहा कि डॉ. आंबेडकर संविधान निर्माण की प्रक्रिया में प्रमुख भूमिका निभाने वाले नेताओं में शामिल थे और उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। ऐसे में उनके योगदान का उल्लेख करते समय घटनाओं को उनके ऐतिहासिक संदर्भ में देखना जरूरी है।

हिंदू कोड बिल के संदर्भ में नेहरू-आंबेडकर संबंधों पर चर्चा

डॉ. आंबेडकर और तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के संबंधों का उल्लेख करते हुए मेश्राम ने 1951 के हिंदू कोड बिल से जुड़े घटनाक्रम का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि विधेयक को लेकर हुई देरी और सरकार की भूमिका से डॉ. आंबेडकर असंतुष्ट थे और बाद में उन्होंने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।

मेश्राम ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के योगदान को समझने के लिए किसी अन्य राजनीतिक व्यक्तित्व के साथ उनकी तुलना करने के बजाय उनके स्वतंत्र योगदान और ऐतिहासिक भूमिका पर चर्चा की जानी चाहिए।

1975 की आपातकालीन स्थिति का भी उल्लेख

पत्रकार परिषद में मेश्राम ने कांग्रेस शासन के दौरान 1975 में लागू की गई आपातकालीन स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक इतिहास और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा करते समय संबंधित घटनाओं और संवैधानिक प्रावधानों को उनके संदर्भ में समझना आवश्यक है।

आंबेडकरी आंदोलन से जुड़ाव को लेकर मेश्राम का दावा

अभिजीत दिपके और उनके परिवार के आंबेडकरी आंदोलन से जुड़े होने के संबंध में मेश्राम ने कहा कि उन्हें इस तरह की कोई प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आंबेडकरी आंदोलन के इतिहास और उसके सामाजिक संदर्भ को समझने के बाद ही उसके विचारों और विरासत पर सार्वजनिक रूप से चर्चा की जानी चाहिए।

यह टिप्पणी मेश्राम का दावा है और इसे लेकर दिपके या उनके परिवार की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी इस बयान में नहीं दी गई है।

संवैधानिक संस्थाओं पर तथ्यात्मक चर्चा की अपील

मेश्राम ने 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, अभिजीत दिपके के नेतृत्व में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था।

मेश्राम ने कहा कि चुनाव आयोग सहित संवैधानिक संस्थाओं को लेकर राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन युवाओं के बीच इन संस्थाओं की भूमिका और संवैधानिक व्यवस्था की तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना जरूरी है।

युवाओं के बीच संवैधानिक जागरूकता पर जोर

मेश्राम ने कहा कि युवाओं के सामने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान निर्माण में योगदान, सामाजिक न्याय की अवधारणा और संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों को ऐतिहासिक संदर्भ के साथ रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, राजनीतिक बहस के दौरान भी ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक और जिम्मेदार संवाद आवश्यक है।

पढ़ने के लिए धन्यवाद

आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।

Add a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
↑
Tap to Refresh