राहुल गुप्ता
मुंबई, 28 सितंबर। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राऊत ने महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे के काम की तारीफ करते हुए उनके विभाग के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राऊत ने कहा कि एफडीए की कार्रवाई से मिलावटी दूध, पनीर और अस्वच्छ किचन के खिलाफ नियंत्रण बढ़ा है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि मुंढे की कार्रवाई की आड़ में विभाग के कुछ अधिकारी होटल और अन्य खाद्य कारोबारियों से कथित तौर पर वसूली कर रहे हैं।
‘मुंढे के काम पर आपत्ति नहीं, लेकिन विभाग पर भी नजर रखें’
राऊत ने कहा कि उन्हें तुकाराम मुंढे के काम पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुंढे की तारीफ भी की। हालांकि, राऊत का दावा है कि विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित गतिविधियों पर भी नजर रखने की जरूरत है।
राऊत के मुताबिक, एफडीए की प्रक्रिया में पहले नोटिस दिया जाता है, सुधार के लिए समय दिया जाता है और नियमों का पालन नहीं होने पर लाइसेंस रद्द किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाइसेंस रद्द होने के बाद उसे दोबारा शुरू कराने के नाम पर कथित तौर पर लेन-देन किया जा रहा है।
‘रेट बढ़ने का मेरे पास वीडियो रिकॉर्डिंग का दावा’
राऊत ने आरोप लगाया कि पहले एफडीए की कार्रवाई से जुड़े मामलों में 8-9 हजार रुपये में कथित लेन-देन होता था, लेकिन मुंढे के कार्यकाल में कथित ‘रेट’ बढ़ गए हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध में वीडियो रिकॉर्डिंग है।
उन्होंने दावा किया कि कुछ अधिकारियों की ओर से होटल संचालकों को कथित तौर पर ब्लैकमेल किया जा रहा है। राऊत ने कहा कि वह एफडीए विभाग को बदनाम नहीं करना चाहते, क्योंकि उनके अनुसार तुकाराम मुंढे अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन उनके पीछे चल रही कथित वसूली पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
बड़ी फार्मा कंपनियों पर भी कार्रवाई की मांग
संजय राऊत ने बड़ी फार्मा कंपनियों पर भी छापेमारी और जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटी दुकानों और होटल कारोबारियों पर कार्रवाई होती है, जबकि बड़ी कंपनियों के पास राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव अधिक है।
राऊत ने दावा किया कि बड़ी फार्मा कंपनियों की ओर से हजारों करोड़ रुपये की फंडिंग की जाती है और यदि इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई तो तुकाराम मुंढे का तबादला किया जा सकता है। ये आरोप राऊत ने लगाए हैं; इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं है।
‘पहले सुधार का मौका दिया जाना चाहिए’
राऊत ने कहा कि खाद्य कारोबारियों को सीधे लाइसेंस रद्द करने के बजाय पहले सुधार का मौका दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, नोटिस देकर करीब 15 दिन का समय दिया जा सकता है और सुधार नहीं होने पर लाइसेंस रद्द किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस जल्दबाजी में रद्द किए जा रहे हैं, जिससे रोजगार प्रभावित होता है। राऊत ने इन आरोपों के समर्थन में अपने पास सबूत होने का दावा किया है।
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