बारिश की कमी और भूजल स्तर में गिरावट के बीच जिला प्रशासन ने ग्रामीण इलाकों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए हैं।
राहुल गुप्ता
लातूर, 22 अक्टूबर। महाराष्ट्र के लातूर जिले के ग्रामीण इलाकों में बढ़ती पानी की किल्लत को देखते हुए प्रशासन ने पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निजी कुओं और बोरवेल का अधिग्रहण किया है। जिले के 173 गांवों और बस्तियों के लिए कुल 256 कुओं का अधिग्रहण किया गया है। इन जलस्रोतों के माध्यम से नागरिकों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
बारिश की कमी और भूजल स्तर में गिरावट के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की समस्या गंभीर हो गई है। इस स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने विभिन्न तहसीलों में उपलब्ध जलस्रोतों का अधिग्रहण कर पानी की किल्लत से प्रभावित गांवों को राहत देने की कोशिश की है।
प्रशासन का जोर उपलब्ध जलस्रोतों का उपयोग कर लोगों तक पेयजल पहुंचाने पर है। गर्मी शुरू होने से पहले ही सूखे जैसे हालात महसूस होने के कारण इन उपायों का महत्व बढ़ गया है।

औसा तहसील में सबसे अधिक कुओं का अधिग्रहण
जिला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, औसा तहसील में 32 गांवों के लिए सबसे अधिक 51 कुओं का अधिग्रहण किया गया है। इसके अलावा निलंगा तहसील में 25 गांवों के लिए 45, अहमदपुर में 38 गांवों के लिए 41 और रेणापुर में 21 गांवों के लिए 28 कुओं का अधिग्रहण किया गया है।
देवणी तहसील में 11 गांवों के लिए 24, लातूर तहसील में 13 गांवों के लिए 19, चाकूर में 17 गांवों के लिए 17, उदगीर में सात गांवों के लिए सात और शिरूर अनंतपाल तहसील में नौ गांवों के लिए 24 कुओं का अधिग्रहण किया गया है।
पानी की किल्लत दूर करने के लिए प्रशासन सतर्क
जिला प्रशासन ने संभावित जल संकट से निपटने के लिए गर्मी से पहले ही उपाययोजनाएं शुरू कर दी हैं। पानी की कमी से प्रभावित गांवों में उपलब्ध जलस्रोतों के जरिए पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य ग्रामीण नागरिकों को पानी की किल्लत से राहत देना है।
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