ओबीसी के मुद्दे पर राहुल गांधी ने सबसे पहले उठाई आवाज : डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 04 अक्टूबर। कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद ने कहा कि देश में ओबीसी समाज के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले नेताओं में राहुल गांधी प्रमुख हैं और उन्होंने जातिगत जनगणना की मांग को जोरदार तरीके से आगे बढ़ाया। उनके मुताबिक, प्रत्येक समाज की आबादी के अनुपात में उसे प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। राहुल गांधी लंबे समय से जातिगत जनगणना को सामाजिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर उठाते रहे हैं।

तिलक भवन में ओबीसी कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर

मुंबई स्थित कांग्रेस मुख्यालय टिळक भवन में ओबीसी कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर और ‘मंडल विरुद्ध मनुवाद’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सचिव रेहाना चिस्ती, ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रा. यशपाल भिंगे, सांसद प्रतिभा धानोरकर और प्रवक्ता हनुमंत पवार सहित अन्य नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में जातिगत जनगणना, आरक्षण और ओबीसी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर चर्चा हुई।

आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा बढ़ाने की मांग

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प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि महाराष्ट्र में विभिन्न समाजों की ओर से आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन चल रहे हैं। उन्होंने आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा बढ़ाने और जातिगत जनगणना को इस मुद्दे का समाधान बताया। उन्होंने राज्य सरकार पर मराठा और ओबीसी समाज के बीच मतभेद बढ़ाने का आरोप भी लगाया। ये आरोप सपकाल ने कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में लगाए।

‘मनुवाद के खिलाफ समता का विचार जरूरी’

विजय वडेट्टीवार ने कहा कि ओबीसी समाज के अधिकारों को लेकर राहुल गांधी ने आवाज उठाई और जातिगत जनगणना का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ा। उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग ने ओबीसी समाज के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी। वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि मंडल आयोग के आंदोलन के दौरान समाज में गलतफहमियां फैलाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि सामाजिक विभाजन का जवाब समता के विचार से दिया जाना चाहिए।

ओबीसी समाज को नेतृत्व की भूमिका में लाने पर जोर

ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. यशपाल भिंगे ने मंडल आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष बी.पी. मंडल के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंडल आयोग ने आंकड़े जुटाकर ओबीसी समाज की सामाजिक स्थिति का अध्ययन किया और 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की थी। भिंगे ने कहा कि ओबीसी समाज को केवल मतदान तक सीमित न रहकर नेतृत्व की भूमिका में आगे आना चाहिए।

भिंगे ने बताया कि ‘मंडल विरुद्ध मनुवाद’ पुस्तक को इस उद्देश्य से तैयार किया गया है कि ओबीसी से जुड़े मुद्दों और मंडल आयोग के इतिहास को सामान्य कार्यकर्ताओं तक सरल तरीके से पहुंचाया जा सके। कार्यक्रम में पुस्तक का औपचारिक विमोचन भी किया गया।

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