72 साल में पहली बार दिल्ली के बाहर केवडिया में होगा समारोह, राज ठाकरे ने आयोजन स्थल बदलने पर केंद्र सरकार से सवाल किए और कलाकारों से विरोध की अपील की
Rahul Gupta
मुंबई, 11 सितंबर।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के आयोजन स्थल को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। 72 वर्षों के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह दिल्ली के बजाय गुजरात के केवडिया में आयोजित किया जा रहा है। आयोजन स्थल में इस बदलाव को लेकर ठाकरे ने कई सवाल उठाए हैं।
दिल्ली से केवडिया समारोह ले जाने पर सवाल
राज ठाकरे ने सवाल किया कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के लिए गुजरात के केवडिया को ही क्यों चुना गया। उन्होंने कहा कि अगर समारोह का स्थान बदलना ही था तो इसे दादासाहेब फाल्के की कर्मभूमि महाराष्ट्र या फिल्म निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों में भी आयोजित किया जा सकता था।
ठाकरे ने आरोप लगाया कि मुंबई की आर्थिक महत्ता को नुकसान पहुंचाने के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली के प्रभाव को भी कम करने की कोशिश की जा रही है।
गुजरात को बड़े प्रोजेक्ट दिए जाने का आरोप
मनसे प्रमुख ने दावा किया कि कई बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट लगातार गुजरात की ओर स्थानांतरित किए जा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप फाइनल और गिफ्ट सिटी जैसे उदाहरणों का जिक्र करते हुए इस प्रवृत्ति पर सवाल उठाया।
राज ठाकरे ने गुजराती समाज से भी अपील की कि वह सत्ता के बहकावे में न आए। उन्होंने कहा कि सत्ता बदलने के बाद देश के दूसरे राज्यों के नागरिक और नेता अपने-अपने क्षेत्रों के साथ हुए कथित अन्याय और नुकसान का हिसाब मांग सकते हैं।
कलाकारों से विरोध करने की अपील
राज ठाकरे ने देश के कलाकारों और फिल्म उद्योग से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के आयोजन स्थल में बदलाव का विरोध करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पुरस्कार वितरण की वर्षों पुरानी परंपरा रही है और इसका ऐतिहासिक तथा गरिमापूर्ण जुड़ाव रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कलाकार और अलग-अलग राज्य इस फैसले के खिलाफ एकजुट नहीं हुए तो आने वाले समय में क्षेत्रीय पहचान और अस्मिता से जुड़े सवाल और गहरे हो सकते हैं।
आदित्य ठाकरे ने भी केंद्र पर साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी आयोजन स्थल को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नीत केंद्र सरकार हर बड़े आयोजन और प्रोजेक्ट को गुजरात ले जाना चाहती है। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार गुजरात के लिए है या पूरे देश के लिए।
आदित्य ठाकरे ने परमाणु ऊर्जा संयंत्र, तेल रिफाइनरी परियोजना और डेटा सेंटर जैसे प्रोजेक्ट गुजरात ले जाने की बात कही और तंज कसते हुए कहा कि अच्छे प्रोजेक्ट या पहल महाराष्ट्र में लाई जानी चाहिए। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि गुजरात ले जाने के लिए अब केवल राष्ट्रपति भवन ही बचा है।
सुप्रिया सुले ने दिल्ली में आयोजन की वकालत की
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह देश की राजधानी होने के कारण नई दिल्ली में ही आयोजित किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि क्रिकेट विश्व कप के मुकाबलों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के दौरों समेत कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम गुजरात में आयोजित किए जा रहे हैं। सुले ने कहा कि इससे दिल्ली और मुंबई के महत्व को कम करने की कोशिश हो सकती है।
हिंदी और मराठी दोनों महत्वपूर्ण : सुप्रिया सुले
भाषा के मुद्दे पर सुप्रिया सुले ने कहा कि मराठी और हिंदी दोनों महत्वपूर्ण भाषाएं हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को जितनी भाषाएं सीखनी हों, उन्हें सीखना चाहिए।
सुले के मुताबिक, मराठी और हिंदी दोनों हमारी भाषाएं हैं और दोनों का ज्ञान होना अच्छी बात है। उन्होंने अधिक भाषाएं सीखने को सकारात्मक बताया।
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