आईआईटी पवई के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में परिवार ने मानसिक और जातीय उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। क्राइम ब्रांच प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला का बयान दर्ज करेगी, वहीं राज ठाकरे ने छात्रों को जाति आधारित राजनीति में न उलझने की अपील की है।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 23 सितंबर।
आईआईटी पवई के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। साहिल के माता-पिता और रिश्तेदारों ने आरोप लगाया है कि मानसिक उत्पीड़न और जातिसूचक गालियों के कारण उसने यह कदम उठाया। मामले की जांच जारी है और क्राइम ब्रांच प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला का बयान दर्ज करने वाली है।
इसी बीच मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए मामले को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी छात्र को अपराधी ठहराना या किसी प्रोफेसर को दोषी मान लेना उचित नहीं है।
साहिल वाकोडे की मौत के मामले में जांच जारी
20 वर्षीय साहिल वाकोडे की मौत के बाद आईआईटी प्रशासन और उसके परिवार की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। शुरुआत में आईआईटी प्रशासन की ओर से परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और चैटजीपीटी के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था।
बाद में प्रशासन ने जांच पूरी होने से पहले इस आरोप को सार्वजनिक करने को अनुचित मानते हुए माफी मांगी। दूसरी ओर, साहिल के परिवार ने जातीय उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है।
प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला ने भी मामले में अपनी ओर से पक्ष रखा है। अब क्राइम ब्रांच उनका बयान दर्ज कर मामले से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।
राज ठाकरे ने उठाया सवाल
राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट में साहिल की मौत को लेकर सवाल उठाया कि आखिर एक 20 वर्षीय छात्र को ऐसा कौन-सा दबाव महसूस हुआ कि उसने आत्महत्या का रास्ता चुन लिया।
उन्होंने कहा कि परीक्षा में किसी छात्र द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसे रोकना और नियमों के अनुसार कार्रवाई करना प्रोफेसरों का कर्तव्य है। लेकिन आरोप साबित होने से पहले मृत छात्र को अपराधी ठहराना उचित नहीं है।
इसी तरह राज ठाकरे ने कहा कि जातीय उत्पीड़न का आरोप लगने के बाद जांच पूरी होने से पहले किसी प्रोफेसर को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है।
जाति के मुद्दे पर भी राज ठाकरे ने जताई चिंता
राज ठाकरे ने अपनी पोस्ट में महाराष्ट्र में जाति के आधार पर बढ़ती सामाजिक दूरी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जाति का मुद्दा अब शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचने की चर्चा होना गंभीर विषय है।
उन्होंने विद्यार्थियों से जाति-पाती के आधार पर होने वाली राजनीति में न उलझने की अपील की। राज ठाकरे ने कहा कि साहिल के मामले में जांच के साथ इस बात पर भी विचार होना चाहिए कि एक युवा छात्र को किन परिस्थितियों में अपने जीवन को समाप्त करने का फैसला लेना पड़ा।
उन्होंने कहा कि इस मामले को केवल जाति के नजरिए से देखने के बजाय उस पूरे घटनाक्रम और परिस्थितियों को समझना जरूरी है, जिनके बीच साहिल की मौत हुई।
क्राइम ब्रांच दर्ज करेगी प्रोफेसर का बयान
साहिल वाकोडे मामले में अब क्राइम ब्रांच जांच को आगे बढ़ा रही है। प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला का बयान दर्ज किया जाना जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
फिलहाल साहिल के परिवार की ओर से लगाए गए आरोप और आईआईटी प्रशासन की ओर से सामने रखे गए पक्ष जांच का हिस्सा हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि साहिल की मौत से पहले वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं और विभिन्न आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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