रीमा सिंह
मुंबई, 9 सितंबर।
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के कथित अव्यवस्थित कामकाज को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने MPSC के अध्यक्ष और सचिव को तत्काल पद से हटाने की मांग करते हुए सवाल किया कि क्या आयोग के अध्यक्ष मुख्यमंत्री के ‘खास’ होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।
टिळक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में सपकाल ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से विद्यार्थियों का भविष्य पहले ही प्रभावित हो रहा है। अब MPSC के कथित भोंगळ कारभार का भी छात्रों को सामना करना पड़ रहा है। लाखों विद्यार्थी आयोग के खिलाफ सड़कों पर उतर चुके हैं, लेकिन सरकार अब तक गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रही है।
प्रथमेश देशमुख की मौत पर सरकार को घेरा
सपकाल ने धाराशिव जिले के विद्यार्थी प्रथमेश देशमुख की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए कहा कि MPSC के कामकाज से निराश होकर उन्होंने अपना जीवन समाप्त किया। उन्होंने इसे सरकार और MPSC की कथित लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सदोष मनुष्यवध का मामला दर्ज करने की मांग की। सपकाल ने कहा कि आयोग में अव्यवस्था के बावजूद अध्यक्ष इस्तीफा नहीं दे रहे हैं और पेपर लीक से संबंध नहीं होने का बयान दे रहे हैं।
SIR को बताया ‘भस्मासुर’
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी सपकाल ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में SIR के तहत तीन करोड़ से अधिक मतदाताओं को विभिन्न कारणों से सूची से बाहर किया गया है। इनमें करीब 2.06 करोड़ मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे मतदाता (ASDD) के रूप में चिह्नित किया गया है, जबकि करीब 1.22 करोड़ मतदाताओं को ‘Anomaly’ और ‘Unmapped’ श्रेणी में रखा गया है।
उन्होंने कहा कि इन मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है। कांग्रेस ने दावे-आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 30 नवंबर करने, ‘Anomaly’ और ‘Unmapped’ मतदाताओं की बूथवार सूची जारी करने तथा मतदाताओं को व्यक्तिगत नोटिस देने की मांग की है।
सूखा घोषित करने की मांग
सपकाल ने कहा कि बारिश की कमी से खरीफ फसल बर्बाद हो रही है और किसान परेशान हैं। उन्होंने राज्य में तत्काल सूखा घोषित कर रबी सीजन के लिए किसानों को मुफ्त बीज और खाद देने की मांग की।
आरक्षण पर भी सरकार को घेरा
आरक्षण के मुद्दे पर सपकाल ने भाजपा महायुति सरकार पर मराठा, धनगर, OBC और आदिवासी समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आरक्षण का स्थायी समाधान जातिवार जनगणना से ही संभव है। उन्होंने सरकार से मराठा आरक्षण को लेकर दिए गए आश्वासनों को सार्वजनिक करने की मांग भी की।
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