‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर रिटायर्ड प्रोफेसर दंपती से ठगे ₹1 करोड़, अंतरराज्यीय गिरोह पकड़ा गया

फर्जी पुलिस और जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर की गई ठगी; पुलिस ने 23 लाख रुपये के बैंक खाते फ्रीज किए और 5.33 लाख रुपये का सामान जब्त किया।

राहुल गुप्ता

नांदेड़, 17 अक्टूबर। महाराष्ट्र में सेवानिवृत्त प्रोफेसर दंपती को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर करीब 1 करोड़ रुपये ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में अलग-अलग राज्यों से जुड़े आरोपियों को चरणबद्ध तरीके से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों में जमा 23 लाख रुपये फ्रीज किए हैं और 5.33 लाख रुपये का सामान जब्त किया है।

जांच में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला था। पुलिस ने कथित मुख्य सूत्रधारों, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले आरोपियों और तकनीकी मदद करने वालों की पहचान की। गिरफ्तार आरोपियों में नवी मुंबई के तलोजा की एक महिला, सातारा जिले के शिरवल निवासी अफताब अब्दुल पठाण, कराड निवासी तौफिक उर्फ बिल्ला इनायतउल्ला पटेल, पंजाब के मोहाली निवासी गुरप्रीत सिंह जगजीत सिंह और जीरकपुर निवासी साहिल बालकृष्ण कटारिया शामिल हैं।

बैंक कार्ड, सिम कार्ड और मोबाइल फोन जब्त

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पुलिस ने आरोपियों के पास से विभिन्न बैंकों के 19 एटीएम/डेबिट कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, तीन कॉर्पोरेट कार्ड, बैंक खातों से जुड़े 18 सिम कार्ड, 10 एंड्रॉयड मोबाइल फोन और 33,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत 5.33 लाख रुपये बताई गई है।

साइबर पुलिस थाने के निरीक्षक गणेश कदम और उनकी टीम ने तकनीकी विश्लेषण के साथ बैंक खातों की कई स्तरों वाली श्रृंखला की जांच की। पुलिस के अनुसार, लेयर-1 से लेयर-11 तक खातों के लेन-देन का अध्ययन कर गिरोह के नेटवर्क का पता लगाया गया।

व्हाट्सऐप वीडियो कॉल से डराकर वसूले पैसे

आरोपियों का तरीका सरकारी जांच एजेंसियों के अधिकारियों का रूप धारण करना था। वे व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते और खुद को दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) या आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) का अधिकारी बताते थे।

पीड़ितों को डराया जाता था कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादियों ने बैंक खाते खोलने के लिए किया है। इसके बाद ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देकर उनसे पैसे जमा कराए जाते थे। गिरोह ने रिजर्व बैंक के नाम से कथित तौर पर फर्जी पत्र भी भेजे और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 11 हजार रुपये जमा कराए।

अगस्त में दर्ज हुआ था मामला

इस मामले में शहर के समाधाननगर निवासी भीमराव बडोले की शिकायत के आधार पर अगस्त के पहले सप्ताह में नवा मोंढा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक पंकज कुमावत, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तानाजी चिखले और सहायक पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार के मार्गदर्शन में जांच टीम ने कार्रवाई की। टीम में पुलिस निरीक्षक गणेश कदम के साथ सतीश डोंकलवार, शाकीर शेख, दामिनी ननवरे, बालाजी किरवले, बालाजी रेड्डी और गणेश कौटकर सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।

पुलिस की नागरिकों से अपील

पुलिस अधीक्षक पंकज कुमावत ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस, सीबीआई या रिजर्व बैंक वीडियो कॉल के जरिए किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही इस तरह पैसे मांगती है।

ऐसी संदिग्ध कॉल आने पर घबराने या पैसे भेजने के बजाय तुरंत नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करें या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

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