राहुल गुप्ता
मुंबई, 27 सितंबर। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले करीब 40 लाख नए वोटर जोड़े गए। पवार के मुताबिक, 2019 से 2024 के बीच पांच वर्षों में करीब 32 लाख वोटर जुड़े थे, जबकि लोकसभा चुनाव के बाद केवल छह महीनों में यह संख्या करीब 40 लाख रही।
हर महीने 6.5 लाख वोटर जुड़ने का दावा
रोहित पवार ने कहा कि 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बीच औसतन हर महीने करीब 53 हजार नए मतदाता जुड़े। इसके विपरीत, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद छह महीनों में हर महीने औसतन करीब 6.5 लाख मतदाता जुड़ने का उन्होंने दावा किया।
पवार ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भी करीब 6.5 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। उन्होंने इसे सत्ताधारी दल के चुनावी लाभ से जोड़ते हुए दावा किया कि यह प्रक्रिया भारतीय जनता पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई।
इन आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। 27 सितंबर को प्रकाशित अन्य रिपोर्टों में भी रोहित पवार द्वारा मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम जोड़ने और हटाने के आरोप लगाए जाने का उल्लेख है।
एसआईआर को लेकर भी उठाए सवाल
रोहित पवार ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सत्यापन प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कारण महाराष्ट्र में करीब तीन करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं और हर पांच में से एक मतदाता इस प्रक्रिया से प्रभावित हो सकता है। 27 सितंबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पवार ने वर्तमान में करीब 2.07 करोड़ नामों के बाहर होने का दावा करते हुए यह संख्या लगभग तीन करोड़ तक पहुंचने की आशंका जताई।
पवार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर भी आरोप लगाए और कहा कि वह केंद्र सरकार के प्रतिनिधि की तरह काम कर रहे हैं। ये पवार द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पर भी आरोप
पवार ने महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि नासिक के जिला कलेक्टर रहते हुए चोकलिंगम के ससुराल पक्ष ने सरूल गांव में रिंग रोड के पास जमीन खरीदी थी। पवार के अनुसार, 2025 में उनके ससुर की मृत्यु के बाद यह जमीन चोकलिंगम के नाम ट्रांसफर हुई।
पवार ने आरोप लगाया कि जिस इलाके में किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया, वहां इस जमीन को अधिग्रहण से बाहर रखा गया और बाद में यह रिंग रोड के सामने आ गई। उन्होंने इसे संभावित हितों के टकराव का सवाल बताते हुए जांच की मांग उठाई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हुई है।
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