एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे पर रोहित पवार गलत जानकारी फैला रहे : भाजपा

भाजपा प्रवक्ता नवनाथ बन का आरोप,संवैधानिक प्रक्रिया की जानकारी लें राकांपा विधायक,विद्यार्थियों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 6 अक्टूबर। महाराष्ट्र भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के विधायक रोहित पवार पर महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष के इस्तीफे को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि रोहित पवार को इस मुद्दे पर बयान देने से पहले संविधान में निर्धारित प्रक्रिया का अध्ययन करना चाहिए।

राज्यपाल या राष्ट्रपति को दिया जाता है इस्तीफा

भाजपा प्रदेश कार्यालय में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में बन ने कहा कि एमपीएससी अध्यक्ष का इस्तीफा मुख्यमंत्री को नहीं, बल्कि निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल या राष्ट्रपति को दिया जाता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 317 का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है।

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उन्होंने कहा कि मंत्री अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को, विधानसभा सदस्य विधानसभा अध्यक्ष को और विधान परिषद सदस्य सभापति को देते हैं। इसी तरह लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष के लिए संविधान में अलग प्रक्रिया निर्धारित है। बन के अनुसार, इस व्यवस्था की जानकारी के बिना रोहित पवार जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

विद्यार्थियों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप

बन ने आरोप लगाया कि रोहित पवार अपने राजनीतिक हितों के लिए विद्यार्थियों के मुद्दे का इस्तेमाल कर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को विद्यार्थियों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला और इसके लिए बारामती एग्रो के कार्यकर्ताओं को लाना पड़ा।

उन्होंने यह भी कहा कि मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने आंदोलन में पहुंचकर एमपीएससी अध्यक्ष को प्राप्त संवैधानिक और कानूनी संरक्षण का उल्लेख किया है।

‘जनता तय करे आंदोलन विद्यार्थियों का या राजनीतिक’

रोहित पवार के राजनीतिक कद पर टिप्पणी करते हुए बन ने कहा कि वे अपने दादा की राजनीतिक विरासत के कारण विधायक बने हैं। उन्होंने कहा कि यदि एमपीएससी आंदोलन के दौरान किसी विधायक को विधानसभा में प्रवेश से रोकने की राजनीतिक घोषणा की जाती है और उस पर कार्यकर्ता तालियां बजाते हैं, तो महाराष्ट्र की जनता को तय करना चाहिए कि यह वास्तव में विद्यार्थियों का आंदोलन है या राजनीतिक आंदोलन।

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