मोहोल से वाडी जंक्शन तक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, कवच, ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण से जुड़े कार्य होंगे
राहुल गुप्ता
सोलापुर, 20 सितंबर।
भारतीय रेलवे ने मध्य रेलवे के सोलापुर डिवीजन के सात महत्वपूर्ण स्टेशनों पर आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था विकसित करने के लिए 209 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। परियोजना के तहत हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन) रूट-7 पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई), कवच, ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) और केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण (सीटीसी) से जुड़े कार्य किए जाएंगे।
रेल परिचालन होगा अधिक सुरक्षित
आधुनिक सिग्नलिंग परियोजना से मराठवाड़ा क्षेत्र में रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। नई तकनीक के जरिए ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।
इससे व्यस्त रेल मार्गों पर परिचालन दक्षता बढ़ाने और ट्रेनों के संचालन में होने वाली देरी को कम करने में सहायता मिल सकती है। साथ ही आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था से यात्रियों की सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है।
इन सात स्टेशनों को किया गया शामिल
स्वीकृत परियोजना में मोहोल, मुंधेवाड़ी, बाले, सोलापुर, होटगी जंक्शन-होटगी ए केबिन, शाहबाद और वाडी जंक्शन को शामिल किया गया है। इन स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की आधुनिक प्रणाली स्थापित की जाएगी।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग पारंपरिक रिले आधारित इंटरलॉकिंग की तुलना में अधिक उन्नत कंप्यूटर आधारित सिग्नलिंग तकनीक है। इसके जरिए रेलवे के पॉइंट्स और सिग्नलों को अधिक विश्वसनीय तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।
तकनीकी गड़बड़ियों का पता लगाने में मिलेगी मदद
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग व्यवस्था से किसी तकनीकी गड़बड़ी का पता लगाने और उसे दूर करने में कम समय लगने की उम्मीद है। इससे सिग्नलिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ने के साथ रखरखाव का काम भी आसान होगा।
कवच और ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग पर जोर
परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ के क्रियान्वयन को गति देना है। इसके अलावा ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और केंद्रीकृत यातायात नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी।
इन तकनीकों से व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी। रेलवे के अनुसार, परियोजना उच्च घनत्व वाले मार्गों पर सिग्नलिंग बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और रेल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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