एकनाथ शिंदे के फैसलों और योजनाओं की सूची के साथ लगाए गए व्यंग्यात्मक पोस्टर की चर्चा तेज, मनोज जरांगे पाटील के साथ राजनीतिक खींचतान के बीच सामने आया मामला।
राहुल गुप्ता
बीड, 22 अक्टूबर। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठा समाज के लिए कौन-कौन से फैसले लिए और योजनाएं लागू कीं, इसका लेखा-जोखा पेश करने वाला एक पोस्टर इन दिनों चर्चा में है। बीड शहर में लगाए गए इस पोस्टर पर बड़े अक्षरों में लिखा है, ‘शिंदे साहब, आपसे थोड़ी चूक हो गई!’ पोस्टर में मराठा समाज के हित में सरकार की ओर से किए गए कार्यों की सूची दी गई है।
बीड शहर में पोस्टर और बैनर के जरिए राजनीतिक या सामाजिक भावनाएं व्यक्त करने का चलन पहले भी देखने को मिला है। इससे पहले ‘मन के मुख्यमंत्री’ और ‘भावी मंत्री’ जैसे संदेशों वाले पोस्टर भी चर्चा में रहे हैं। फिलहाल मनोज जरांगे पाटील और एकनाथ शिंदे के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच इस नए पोस्टर ने लोगों का ध्यान खींचा है।
कुणबी प्रमाणपत्र और आरक्षण का किया गया उल्लेख
पोस्टर पर दावा किया गया है कि मराठवाड़ा में पिछले 40 वर्षों के दौरान केवल 2,000 कुणबी प्रमाणपत्र जारी हुए थे, जबकि एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में दो वर्षों के भीतर 3.50 लाख प्रमाणपत्रों की पहचान की गई। इसमें मराठा समाज को 10 प्रतिशत एसईबीसी आरक्षण दिए जाने और मराठवाड़ा के 3.50 लाख विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने का भी उल्लेख है।
पोस्टर के अनुसार, अंतरवाली में आयोजित सभा के कारण गरीब किसानों की खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा था। इसकी भरपाई के लिए किसानों को 1 करोड़ 43 लाख रुपये दिए गए। मराठा आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों के परिवारों को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने का भी जिक्र किया गया है।
इसमें यह दावा भी किया गया है कि मुख्यमंत्री रहते हुए एकनाथ शिंदे ने औपचारिक प्रोटोकॉल को दरकिनार कर समाज की भावनाओं को समझने की कोशिश की और दो बार अनशन समाप्त कराने में भूमिका निभाई।
नौकरी, कर्ज योजना और सारथी संस्थान का भी जिक्र
पोस्टर में कहा गया है कि 5,300 मराठा युवाओं को अधिसंख्य पदों पर नियुक्तियां देकर प्रथम श्रेणी के अधिकारी बनने का अवसर दिया गया। अण्णासाहेब पाटील आर्थिक विकास महामंडल की कर्ज योजना के तहत मिलने वाली सहायता सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये किए जाने का भी उल्लेख है। पोस्टर में दावा किया गया है कि इस योजना से लाखों उद्यमियों को मदद मिली।
इसके अलावा, सारथी संस्थान को हजारों करोड़ रुपये का कोष देने और इसके माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा तथा भारतीय पुलिस सेवा समेत कई अधिकारी तैयार होने की बात कही गई है। पुणे में सारथी के मुख्यालय के साथ नासिक, कोल्हापुर, नागपुर, लातूर और नवी मुंबई में क्षेत्रीय कार्यालयों तथा छात्रावासों के निर्माण का भी उल्लेख किया गया है।
अंत में व्यंग्यात्मक टिप्पणी
पोस्टर के अंत में व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा गया है, ‘इतना सब करने के बाद भी शिंदे साहब, सच में आपसे चूक हो गई! चार राजनीतिक प्रमाणपत्रों के लिए आपका बाजार उठा देते हैं, यह कैसी भाषा है?’
पोस्टर के जरिए मराठा समाज के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर कटाक्ष किया गया है। हालांकि, पोस्टर में दिए गए आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
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