राहुल गुप्ता
मुंबई, 29 सितंबर। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने दो साल तक के बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले शिशु आहार और फीडिंग उत्पादों को लेकर सख्त कंप्लायंस ऑर्डर जारी किया है। इसके दायरे में इन्फेंट फॉर्मूला, इन्फेंट मिल्क फूड, फॉलो-अप फॉर्मूला, कॉम्प्लिमेंटरी फूड, विशेष चिकित्सकीय उपयोग के लिए खाद्य पदार्थ और फीडिंग बॉटल्स शामिल हैं। इन उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग, विज्ञापन, प्रचार और बिक्री से जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है।
पूरी सप्लाई चेन पर लागू होंगे नियम
एफडीए का आदेश केवल उत्पाद बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है। निर्माता के साथ ब्रांड मालिक, आयातक, पैकर, वितरक, मेडिकल स्टोर, अस्पताल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
किसी भी फॉर्मूला या शिशु आहार को मां के दूध के बराबर या उससे बेहतर बताकर प्रचारित नहीं किया जा सकेगा। पैकेजिंग पर ‘मां का दूध आपके बच्चे के लिए सर्वोत्तम है’ जैसी सूचना और अन्य जरूरी चेतावनियां प्रमुखता से देनी होंगी।
फ्री सैंपल और कैशबैक पर रोक
नियमों के तहत फ्री सैंपल, गिफ्ट, कूपन, कैशबैक और अन्य प्रलोभनों के जरिए इन उत्पादों का प्रचार नहीं किया जा सकता। टीवी, प्रिंट मीडिया, वेबसाइट, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के साथ इन्फ्लुएंसर्स के जरिए भी प्रतिबंधित प्रचार पर रोक रहेगी।
डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, अस्पतालों और मेडिकल संगठनों को उपहार, आर्थिक लाभ, स्पॉन्सरशिप, हॉस्पिटैलिटी या स्पीकर फीस देकर उत्पादों का प्रचार कराने की भी अनुमति नहीं होगी। कॉन्फ्रेंस, सीएमई, सीपीडी, सेमिनार, वर्कशॉप या रिसर्च के नाम पर भी ऐसे लाभ देने पर नियम लागू होंगे।
पैकेट पर हर जरूरी जानकारी देनी होगी
शिशु आहार के पैकेट पर बच्चे की उम्र, इस्तेमाल का तरीका, सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और जरूरी चेतावनियां स्पष्ट रूप से लिखनी होंगी। ‘कम्प्लीट’, ‘हेल्थ फूड’, ‘एनर्जी फूड’ और ‘ह्यूमनाइज्ड’ जैसे शब्दों के जरिए उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा करने वाले दावे भी नियमों के दायरे में आएंगे।
शिशु या महिला की तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी रोक है। कॉम्प्लिमेंटरी फूड छह महीने की उम्र के बाद ही दिया जाना चाहिए। उत्पादों में एडेड कलर, फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव और अन्य प्रतिबंधित पदार्थों का इस्तेमाल निर्धारित मानकों के खिलाफ नहीं किया जा सकेगा। सुक्रोज और फ्रुक्टोज की कुल मात्रा कुल कार्बोहाइड्रेट के 20 प्रतिशत तक सीमित रहेगी।
उल्लंघन पर जांच और कार्रवाई
नियमों का उल्लंघन मिलने पर एफडीए जांच, सैंपलिंग, तलाशी और जब्ती की कार्रवाई कर सकता है। उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर अभियोजन और जुर्माने के साथ लाइसेंस पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
यह आदेश खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 तथा खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 के तहत लागू किया गया है। इन नियमों के तहत संबंधित उत्पादों को शिशु दूध विकल्प और फीडिंग बॉटल से जुड़े कानून और उसके संशोधनों का भी पालन करना होगा।
अस्पतालों और बाल रोग विशेषज्ञों को संदिग्ध प्रतिकूल घटनाओं की जानकारी संबंधित विभाग को देने के लिए कहा गया है। एफडीए ने अस्पतालों, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और अन्य संगठनों के साथ बैठकें करने की भी बात कही है।
छह महीने तक स्तनपान पर भी जोर
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में छह महीने तक के बच्चों में विशेष स्तनपान की दर करीब 55.8 प्रतिशत है। शहरों में यह आंकड़ा करीब 52.8 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 75.2 प्रतिशत बताया गया है। करीब 96 प्रतिशत प्रसव संस्थागत स्तर पर होने के बावजूद जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराने के लिए अस्पतालों में बेहतर परामर्श की जरूरत बताई गई है।
छह महीने के बाद स्तनपान के साथ उचित पूरक पोषण की सलाह दी जाती है। शिशु आहार की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन उसकी मार्केटिंग और प्रचार के लिए कड़े नियम लागू हैं।
एफडीए अधिकारियों पर लगे आरोपों पर भी विवाद
इस बीच एफडीए के अधिकारियों पर कथित वसूली के आरोपों को लेकर भी विवाद चल रहा है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि होटल, रेस्तरां और क्विक-कॉमर्स कारोबारियों को लाइसेंस निलंबित करने की धमकी देकर पैसे मांगे जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की है।
तुकाराम मुंढे ने कहा है कि केवल आरोपों के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती और ठोस सबूत जरूरी हैं। उनके मुताबिक, शिकायतकर्ता को यह बताना होगा कि किस अधिकारी ने किस व्यक्ति से और किस काम के लिए पैसे मांगे। उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों के लिए एसीबी समेत सक्षम एजेंसियों के सामने सबूत देने की बात कही है।
सरोगेट विज्ञापन मामले में अभिनेताओं ने दिया जवाब
महाराष्ट्र एफडीए के सरोगेट विज्ञापन मामले में भी अपडेट सामने आया है। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के मुताबिक, अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ ने विभाग की ओर से जारी नोटिस का जवाब दे दिया है।
तीनों अभिनेताओं को एक विज्ञापन को लेकर नोटिस जारी किया गया था। एफडीए ने इसमें प्रतिबंधित तंबाकू या निकोटीन उत्पाद के कथित अप्रत्यक्ष प्रचार को लेकर सवाल उठाए थे। मुंढे के मुताबिक, तीनों में से दो अभिनेताओं ने सुनवाई की मांग की थी और दोनों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि तीनों में से किन दो अभिनेताओं ने सुनवाई में हिस्सा लिया।
पढ़ने के लिए धन्यवाद
आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।