उद्धव ठाकरे के बयान पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण का पलटवार
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 4 अक्टूबर। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। रविवार को मुंबई में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में ‘गर्जना मोर्चा’ निकाला गया। मोर्चे के समापन पर उद्धव ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। इसके बाद भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने ठाकरे बंधुओं के आरोपों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा में दिए गए वक्तव्य का हवाला देकर विरोधियों से चार सवाल पूछे।
घुसपैठियों को लेकर चव्हाण का सवाल
रविंद्र चव्हाण ने कहा कि क्या देश का प्रधानमंत्री और राज्य का मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह घुसपैठिए तय करेंगे? यदि ऐसा हुआ तो क्या लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या एक मतदाता को एक से अधिक स्थानों पर मतदान करने की अनुमति होनी चाहिए और क्या मृत नागरिकों के नाम मतदाता सूची में बने रहने चाहिए? चव्हाण ने ये सवाल अमित शाह के लोकसभा में दिए गए बयान का वीडियो साझा करते हुए विरोधियों के सामने रखे।
उद्धव ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना
गर्जना मोर्चे के दौरान उद्धव ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर वैध-अवैध मतदाताओं का फैसला करने का अधिकार दिल्ली में बैठे अधिकारियों को दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि बूथ स्तर के अधिकारियों और मतदाता सूची से जुड़े मामलों का फैसला ज्ञानेश कुमार कैसे करेंगे। ठाकरे ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या भारत देश ज्ञानेश कुमार के पिता का है।
ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर भी सवाल
उद्धव ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति में पक्षपात का आरोप लगाते हुए उनकी भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी को सेवानिवृत्ति के बाद भी संरक्षण मिलता है तो इसकी वजह बताई जानी चाहिए। ठाकरे बंधुओं के इस मोर्चे में चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए गए तथा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई।
राज-उद्धव एक मंच पर
मुंबई में आयोजित इस मोर्चे में लंबे समय बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। मोर्चे में केवल तिरंगा इस्तेमाल करने की घोषणा की गई थी।
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