राहुल गुप्ता
मुंबई, 30 सितंबर। एक डे केयर सेंटर के फ्रीजर में करीब चार साल से 78 वर्षीय बुजुर्ग का शव रखे होने का मामला सामने आया है। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, बुजुर्ग की मौत 9 जून 2022 को कैंसर की वजह से हुई थी। आरोप है कि उनके बेटे और बेटी ने भविष्य में पिता को दोबारा जिंदा किए जाने की उम्मीद में शव को सुरक्षित रखने का फैसला किया था।
बताया जा रहा है कि शव को सेंटर में रखने के लिए परिवार की ओर से हर महीने करीब 1 लाख 60 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा था। बीते सोमवार रात सेंटर से तेज बदबू आने की शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। सेंटर बंद था, इसलिए पुलिस ने ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। तलाशी के दौरान एक फ्रीजर में बुजुर्ग का शव मिला।
पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
बदबू से हुआ चार साल पुराने शव का खुलासा
पुलिस के मुताबिक, कुरार इलाके में स्थित डे केयर सेंटर से बदबू आने की शिकायत मिली थी। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सेंटर बंद होने के कारण ताला तोड़कर अंदर दाखिल हुई। जांच के दौरान फ्रीजर में बुजुर्ग का शव मिला।
जांच में पता चला कि शव अंधेरी निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग का है। उनकी मौत 9 जून 2022 को कैंसर की वजह से हुई थी। परिवार ने पुलिस को बुजुर्ग का डेथ सर्टिफिकेट और बीएमसी में जमा किए गए कुछ दस्तावेजों की रसीदें भी दिखाई हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मौत के बाद शव को इतने लंबे समय तक फ्रीजर में क्यों और किसकी जानकारी में रखा गया था।
पिता को दोबारा जिंदा होने की थी उम्मीद?
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात बुजुर्ग के बच्चों से जुड़ी बताई जा रही है। उनका बेटा मुंबई में रहता है, जबकि बेटी अमेरिका में रहती है। जानकारी के मुताबिक, बेटी को क्रायोनिक्स की अवधारणा के बारे में जानकारी मिली थी।
परिवार के मुताबिक, उन्हें उम्मीद थी कि भविष्य में विज्ञान इतनी तरक्की कर सकता है कि मृत व्यक्ति को दोबारा जीवित करने का कोई रास्ता संभव हो सके। इसी उम्मीद के चलते बुजुर्ग के शव को सुरक्षित रखने का फैसला किया गया।
इसके लिए परिवार की ओर से डे केयर सेंटर को हर महीने करीब 1 लाख 60 हजार रुपये दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि परिवार ने शव को सरकारी अस्पताल की मोर्चरी के बजाय निजी सेंटर के फ्रीजर में क्यों रखा।
चार साल तक हर महीने दिए जा रहे थे 1.60 लाख रुपये
डे केयर सेंटर के मालिक के भाई अकबर खान के मुताबिक, शव करीब चार साल से सेंटर में रखा हुआ था। उनका कहना है कि सेंटर के मालिक के परिवार के कुछ लोगों को भी इसकी जानकारी थी।
अकबर खान के मुताबिक, इस जगह का इस्तेमाल पहले जिम के तौर पर किया जाता था। इसके बाद यहां निजी अस्पताल और फिर डे केयर सेंटर चलाया गया। इस दौरान सेंटर का नाम और किरायेदार कई बार बदले। पुलिस अब यह पता कर रही है कि अलग-अलग समय पर सेंटर चलाने वाले लोगों को शव के बारे में कितनी जानकारी थी।
बीएमसी ने कुछ महीने पहले सेंटर किया था सील
मामले में बीएमसी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कुछ महीने पहले ही इस डे केयर सेंटर को सील किया था।
अब पुलिस यह जांच कर रही है कि सेंटर को सील करते समय वहां मौजूद फ्रीजर और उसके अंदर रखे सामान की जांच की गई थी या नहीं। अगर फ्रीजर में शव मौजूद था, तो क्या टीम को इसकी जानकारी हुई थी, यह भी जांच का हिस्सा है।
सेंटर सील होने के बाद फ्रीजर में रखे शव की स्थिति क्या थी और बदबू फैलने के बाद ही पुलिस को इसकी जानकारी क्यों मिली, इन सवालों के जवाब भी तलाशे जा रहे हैं। हालांकि, अभी किसी अधिकारी की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
सरकारी मोर्चरी की जगह निजी सेंटर में क्यों रखा शव?
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि परिवार और सेंटर के बीच शव को रखने को लेकर क्या व्यवस्था थी और क्या इसके लिए किसी तरह की अनुमति ली गई थी। इसके अलावा यह पता लगाया जा रहा है कि शव को फ्रीजर में रखने का वास्तविक कारण क्या था और क्या क्रायोनिक्स ही इसके पीछे एकमात्र वजह थी।
पुलिस सेंटर के मालिक, परिवार के सदस्यों, बीएमसी से जुड़े अधिकारियों और आसपास रहने वाले लोगों से भी जानकारी जुटा रही है।
पुलिस ने अभी तक दर्ज नहीं की एफआईआर
मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, परिवार ने बुजुर्ग की मौत से संबंधित दस्तावेज पुलिस के सामने पेश किए हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शव को सेंटर में किसकी अनुमति से रखा गया था, इसके लिए भुगतान कौन कर रहा था और सेंटर में मौजूद अन्य लोगों को इसकी जानकारी थी या नहीं।
पुलिस ने फिलहाल इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। शव की स्थिति और आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर पुलिस कूपर अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों से भी सलाह ले रही है।
क्या है क्रायोनिक्स?
क्रायोनिक्स एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके शरीर या मस्तिष्क को बेहद कम तापमान पर संरक्षित रखने की कोशिश की जाती है। इसके पीछे विचार यह है कि भविष्य में चिकित्सा विज्ञान इतनी प्रगति कर सकता है कि गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त शरीर या कोशिकाओं को ठीक करने और मृत व्यक्ति को दोबारा जीवित करने की संभावना तलाश की जा सके।
हालांकि, अभी तक क्रायोनिक्स के जरिए किसी इंसान को दोबारा जीवित करने में वैज्ञानिकों को सफलता नहीं मिली है। इसलिए भविष्य में किसी मृत व्यक्ति को क्रायोनिक्स के जरिए दोबारा जीवित किया जा सकेगा या नहीं, यह अभी प्रमाणित नहीं है।
फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि बुजुर्ग का शव चार साल तक निजी सेंटर में किस आधार पर रखा गया, सेंटर को हर महीने 1.60 लाख रुपये देने की व्यवस्था कैसे हुई और सेंटर को सील किए जाने के दौरान अधिकारियों को शव की मौजूदगी की जानकारी क्यों नहीं मिली।
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