मुंबई, 27 सितंबर। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आयोग के कार्यों की गहन जांच कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
रिपोर्ट को बताया गंभीर मामला
चव्हाण ने ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा कि चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत गठित संवैधानिक संस्था है। उन्होंने 1995 के टी.एन. शेषन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख करते हुए चुनाव आयुक्तों की भूमिका और अधिकारों की बात कही।
बिना चर्चा फैसले लेने का आरोप
चव्हाण ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने सहयोगी चुनाव आयुक्तों से चर्चा किए बिना आयोग की ओर से फैसले लिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में इससे संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई है और अब तक इसका कोई खंडन नहीं किया गया है।
आयोग के स्पष्टीकरण पर उठाए सवाल
चव्हाण ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर अधिकारों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि आखिर वे किसे चुनाव जिताने में मदद कर रहे थे। उन्होंने आयोग के इस स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठाया कि फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे। उनके अनुसार, कानून के तहत फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर सामूहिक रूप से लिए जाने चाहिए।
राष्ट्रपति से मिलने की मांग
चव्हाण ने कांग्रेस से इंडिया गठबंधन के नेताओं की तत्काल बैठक बुलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति से मुलाकात कर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग
उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट को मामले का स्वतः संज्ञान लेकर चुनाव आयोग के कामकाज की जांच करनी चाहिए। साथ ही, संविधान में निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग भी उन्होंने की।
चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता जरूरी
चव्हाण ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और यदि चुनाव प्रक्रिया में हेरफेर होती है तो लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग भी दोहराई।
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