पार्टी छोड़ने की अटकलों को गजानन कीर्तिकर ने किया खारिज, एकनाथ शिंदे से बातचीत के बाद बदला रुख
राहुल गुप्ता
मुंबई, 10 अक्टूबर। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में गजानन कीर्तिकर की नाराजगी को लेकर सियासी हलचल शुरू हो गई। कीर्तिकर ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पार्टी में नाराज हैं और एकनाथ शिंदे उनसे मुलाकात नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया था कि शिंदे भी वही कर रहे हैं, जो पहले उद्धव ठाकरे ने किया था। हालांकि, उन्होंने साफ किया था कि नाराजगी के बावजूद वह पार्टी नहीं छोड़ेंगे। उनके इस बयान के बाद पार्टी में अंदरूनी खींचतान की चर्चा तेज हो गई।
कीर्तिकर के बयान पर शिंदे ने जताई नाराजगी
गजानन कीर्तिकर की नाराजगी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट में लौटने की अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति है, तो उन्हें इस बारे में विचार करना पड़ेगा। शिंदे ने यह भी कहा कि कीर्तिकर के शाम के कार्यक्रम में शामिल होना है या नहीं, यह भी उन्हें तय करना होगा। उन्होंने कीर्तिकर से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने को कहा।
पत्रकारों से दूरी बनाने की दी सलाह
शिंदे ने कीर्तिकर को पत्रकारों से ज्यादा दोस्ती नहीं करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि वह नुकसान को संभालने के लिए बैठे हैं और शिवसेना एक परिवार है। शिंदे के मुताबिक, मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने खुद को केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि आम आदमी के रूप में देखा।
इसके बाद शिंदे ने कीर्तिकर से संपर्क कर बातचीत की। बताया जा रहा है कि इस बातचीत के बाद उनकी नाराजगी दूर हो गई। कीर्तिकर ने कहा कि लोगों के काम कराने के लिए शिंदे से संपर्क नहीं हो पा रहा था। अब शिंदे ने अपने ओएसडी के माध्यम से संपर्क की व्यवस्था कराने की बात कही है।
कीर्तिकर बोले—पार्टी छोड़ने की खबरें निराधार
बाद में गजानन कीर्तिकर ने मीडिया से बातचीत में पार्टी छोड़ने और नाराज होने की खबरों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि दोपहर से समाचार चैनलों पर ऐसी खबरें देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में संतुष्ट होकर काम कर रहे हैं और गोवा में पार्टी के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
कीर्तिकर ने कहा कि उनकी पार्टी छोड़ने की कोई इच्छा नहीं है और वह किसी दूसरे दल में नहीं जाएंगे। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के साथ संबंधों के कारण उन्होंने अपना पुराना दल छोड़ा था और एकनाथ शिंदे के विद्रोह के समय उनका साथ दिया था।
फोन पर शिंदे से हुई बातचीत
कीर्तिकर के मुताबिक, एकनाथ शिंदे ने उन्हें फोन किया और उनके बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान उन्होंने शिंदे को बताया कि वह नाराज नहीं हैं और शिवसेना छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं। उनके इस बयान के बाद पार्टी छोड़ने की अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की गई है।
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