महाराष्ट्र में बारिश की कमी से चारे और पानी का संकट गहराया, दूध बेचकर होने वाली कमाई से भी पशुओं का खर्च निकालना मुश्किल।
राहुल गुप्ता
बीड, 11 अक्टूबर। महाराष्ट्र में बारिश की कमी से खरीफ की फसल प्रभावित हुई है और अब रबी की खेती पर भी संकट मंडरा रहा है। कई इलाकों में पानी की किल्लत के बीच पशुओं के चारे का संकट भी गहराने लगा है। ऐसे में आष्टी तालुका के शेरी बुद्रुक गांव के युवा किसान सोहल शेख ने सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने अपने पत्र और आपबीती के जरिए बताया कि 50 गायों को पालना अब उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
चारे का भंडार खत्म, सिर्फ दो दिन का इंतजाम
सोहल शेख ने नौकरी की तलाश करने के बजाय अपने माता-पिता के साथ डेयरी व्यवसाय शुरू किया था। आज उनके पास 50 गायें हैं, लेकिन सूखे जैसे हालात ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पशुओं के लिए जमा किया गया चारा खत्म हो चुका है और साइलेज रखने के लिए बनाए गए गड्ढे भी खाली पड़े हैं। उनके पास अब केवल दो दिन के लिए चारा बचा है।
रोजाना 15 हजार रुपये खर्च, दूध से 9 हजार की कमाई
सोहल के मुताबिक, पशुओं के चारे, पानी और खुराक पर हर दिन करीब 15,000 रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि दूध बेचकर लगभग 9,000 रुपये ही मिल रहे हैं। इस तरह रोजाना करीब 6,000 रुपये का अंतर पड़ रहा है।
पानी की कमी के कारण पशुओं को पर्याप्त पानी पिलाना भी मुश्किल हो गया है। गर्मी और देखभाल में आ रही दिक्कतों के बीच दूध का उत्पादन भी घट रहा है। किसान का कहना है कि आर्थिक संकट के कारण उन्हें कर्ज देने के लिए भी कोई तैयार नहीं है।
सरकार से पूछा- पशुओं को कैसे बचाएं?
सोहल शेख का कहना है कि सरकार युवाओं को नौकरी के बजाय अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करती है, लेकिन मौजूदा हालात में डेयरी व्यवसाय चलाना बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने चिंता जताई कि अगर खर्च और कमाई के बीच का अंतर इसी तरह बना रहा, तो उनके सामने बेहद कठिन फैसला लेने की नौबत आ सकती है।
महाराष्ट्र के कई इलाकों में बारिश की कमी से जलसंकट और चारे की समस्या गंभीर हो रही है। ऐसे में सोहल जैसे पशुपालक किसानों के सामने अपने पशुओं को बचाने और व्यवसाय जारी रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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