नवरात्रि से पहले VHP ने आयोजकों से आधार कार्ड जांचने और तिलक लगाने को कहा, विपक्ष ने फैसले को बताया असंवैधानिक
Rahul Gupta
मुंबई, 6 सितंबर।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों के शामिल होने पर रोक लगाने का ऐलान किया है। VHP ने आयोजकों के लिए कुछ गाइडलाइन भी जारी की हैं, जिनके तहत कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की हिंदू पहचान की जांच करने को कहा गया है। नवरात्रि उत्सव 11 अक्टूबर से शुरू होगा।
VHP की ओर से सुझाए गए उपायों में कार्यक्रम में आने वाले लोगों के आधार कार्ड की जांच करना और उनके माथे पर तिलक लगाना शामिल है। संगठन का कहना है कि नवरात्रि देवी की पूजा का पर्व है और इसी वजह से आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए।
VHP ने क्या कहा?
VHP के प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा कि नवरात्रि देवी की पूजा का पर्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखने वाले मुस्लिम इस त्योहार में क्यों शामिल हों।
VHP के इस निर्देश को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। विपक्षी नेताओं ने इसे असंवैधानिक बताते हुए सवाल उठाया है कि क्या RSS प्रमुख मोहन भागवत की ओर से हाल में दिए गए बयानों के बावजूद VHP ने यह फैसला लिया है।
संजय राउत ने VHP पर साधा निशाना
शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने VHP के निर्देश की आलोचना की। उन्होंने RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा कि भारत में मुसलमानों से नफरत करने वाला व्यक्ति सच्चा हिंदू नहीं हो सकता।
राउत ने सवाल किया कि क्या VHP मोहन भागवत के इस विचार से सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि VHP को RSS प्रमुख के हालिया भाषण को सुनना चाहिए।
कांग्रेस ने बताया असंवैधानिक
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने भी VHP के निर्देश पर सवाल उठाया और इसे असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि त्योहारों का उद्देश्य सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देना है।
अमीन पटेल ने कहा कि उन्हें अक्सर सद्भावना के तौर पर डांडिया और नवरात्रि कार्यक्रमों में बुलाया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी तरह ईद और रमजान के अवसर पर उनकी ओर से भी दूसरे समुदायों के लोगों को आमंत्रित किया जाता है।
NCP (SP) ने कानून-व्यवस्था पर उठाया सवाल
NCP (SP) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि VHP का यह निर्देश शांति और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सवाल किया कि महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार इस मामले पर क्या कार्रवाई करेगी।
क्रास्टो ने पूछा कि क्या सरकार चुप रहेगी और VHP को राज्य में कानून-व्यवस्था चलाने की अनुमति देगी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के लोगों को यह भरोसा मिलना चाहिए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
अल्पसंख्यक आयोग ने कहा- त्योहार लोगों को जोड़ते हैं
महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म के त्योहार मनाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कई संगठन मुस्लिमों को भी अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करते हैं।
प्यारे खान के मुताबिक, त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं, बांटने का नहीं। उन्होंने कहा कि अगर कोई आयोजक किसी व्यक्ति को आमंत्रित नहीं करना चाहता तो वह ऐसा कर सकता है, लेकिन कोई व्यक्ति जबरदस्ती किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होता। लोग आम तौर पर तभी जाते हैं, जब उन्हें आमंत्रित किया जाता है।
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