राहुल गुप्ता
जालना, 7 अक्टूबर। सूखे के हालात के बीच पानी की बर्बादी रोकने के लिए जालना शहर में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। अब पानी बर्बाद करने पर नागरिकों पर 5,000 से लेकर 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। महानगरपालिका आयुक्त अंजली शर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
आदेश के मुताबिक, घरों में नल की टोंटियों और अंदरूनी पाइपलाइन में किसी तरह की लीकेज है तो उसे 15 अक्टूबर तक ठीक कराना होगा। पानी भरने के बाद नल को तुरंत बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
महानगरपालिका की जलवाहिनी से पानी खींचने के लिए विद्युत मोटर लगाने, सड़क पर वाहन धोने या घर के सामने सड़क पर पानी डालकर सफाई करने जैसी गतिविधियों को भी पानी की बर्बादी माना जाएगा। ऐसा करते पाए जाने पर जुर्माने के साथ आपराधिक मामला दर्ज करने की कार्रवाई भी प्रस्तावित की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से पानी का इस्तेमाल बेहद सावधानी और जरूरत के मुताबिक करने की अपील की है।
सूखे से फसलें बर्बाद, पंचनामे में तेजी
जिले में बारिश की लंबी खींचतान के कारण खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है। भोकरदन तालुका के आन्वा राजस्व मंडल में किसानों की सूखे से प्रभावित फसलों के पंचनामे में तेजी लाई गई है। तलाठी, ग्रामसेवक और कृषि सहायकों की संयुक्त टीमें किसानों के खेतों तक पहुंचकर फसलों का निरीक्षण कर रही हैं।
रेणुकाई पिंपलगांव, पारध समेत आसपास के गांवों में पंचनामे किए जा चुके हैं। अब राजस्व विभाग की ओर से अन्य क्षेत्रों में भी यह प्रक्रिया तेज की जा रही है। करीब डेढ़ से 2 महीने से बारिश नहीं होने के कारण सोयाबीन, कपास समेत कई खरीफ फसलें सूख गई हैं।
बदनापुर में खेतों तक पहुंची प्रशासन की टीम
बदनापुर तालुका के गेवराई बाजार और आसपास के गांवों में भी फसलों के पंचनामे शुरू हो गए हैं। तलाठी, कृषि सहायक और ग्रामसेवक की संयुक्त टीमें किसानों के खेतों में पहुंचकर फसल की स्थिति और नुकसान का आकलन कर रही हैं।
प्रशासन की ओर से फसल की मौजूदा स्थिति, नुकसान का प्रतिशत और सूखे के कारण पैदा हुई परिस्थितियों को दर्ज किया जा रहा है।
चारे की कमी से दूध कारोबार पर संकट
धाराशिव जिले के भूम तालुका में बारिश नहीं होने के कारण पशुओं के चारे का संकट गहराता जा रहा है। हरा चारा खत्म होने से दूध उत्पादक किसान मुश्किल में हैं। किसानों के मुताबिक, पिछले 2 महीने से बारिश नहीं होने के कारण उनके पास अब केवल 10 से 12 दिन का चारा बचा है।
किसानों ने सरकार से जल्द पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने की मांग की है। चारे की कमी बढ़ने से आने वाले दिनों में दूध उत्पादन और पशुपालन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
यवतमाल में सोयाबीन उत्पादन में बड़ी गिरावट
यवतमाल जिले में भी बारिश की कमी का असर खरीफ फसल पर दिखाई दे रहा है। जिले में सोयाबीन फसल के कटाई प्रयोग शुरू किए गए हैं। यवतमाल तालुका के बोरगांव में जिलाधिकारी विकास मीना की मौजूदगी में किसान नरेश बाजीराव गावंडे के खेत में सोयाबीन की कटाई और मड़ाई का प्रयोग किया गया।
दुष्काळी परिस्थितियों के कारण इस प्रयोग में सोयाबीन का उत्पादन सिर्फ 1.09 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहा। इससे जिले में बारिश की कमी और सूखे के कारण सोयाबीन उत्पादन पर पड़े गंभीर असर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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