नागपुर में गहराने लगा जल संकट, 11 सूत्रीय योजना से गांवों में पानी बचाने की तैयारी

कामठी समेत कई तालुकों में भूजल स्तर गिरा, जिला परिषद ने ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति का नियोजन करने और पानी की बर्बादी रोकने के निर्देश दिए।

राहुल गुप्ता

नागपुर, 17 अक्टूबर। महाराष्ट्र के कई जिलों में सूखे का असर बढ़ने के बीच नागपुर जिला परिषद ने संभावित जल संकट से निपटने के लिए ग्राम पंचायतों हेतु 11 सूत्रीय कार्ययोजना तैयार की है। इसमें जलापूर्ति का समय निर्धारित करने, उपलब्ध जलस्रोतों की समीक्षा, पाइपलाइनों में रिसाव रोकने और लोगों को पानी बचाने के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया है। दूसरी ओर, जिले के कई तालुकों में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है।

ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति का समय तय करने के निर्देश

जिला परिषद ने सभी ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र में जलापूर्ति की मौजूदा स्थिति का आकलन करने और उपलब्ध जलस्रोतों का नियोजन करने को कहा है। इसके तहत गांवों में जलस्रोतों, जलापूर्ति योजनाओं, पानी के भंडार और संभावित समस्याओं की समीक्षा की जाएगी।

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ग्राम पंचायतों को नियमित जलापूर्ति के लिए समय-सारणी निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पाइपलाइन, सार्वजनिक नलों, वाल्व और पानी की टंकियों में रिसाव की पहचान कर तत्काल मरम्मत करने को कहा गया है। इससे उपलब्ध पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

ग्रामसभाओं के जरिए पानी बचाने पर जागरूकता

कार्ययोजना में ग्रामसभाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों, स्कूलों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी से जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया है। प्रत्येक घर के नल में टोंटी लगाना अनिवार्य करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माने जैसी कार्रवाई पर भी निर्देश दिए गए हैं।

आरओ मशीनों से निकलने वाले पानी का जहां संभव हो, सुरक्षित और उचित तरीके से दोबारा इस्तेमाल करने की योजना बनाने को कहा गया है। जिन गांवों में जल संकट की आशंका है, वहां पहले से जरूरी कदम उठाकर संकट निवारण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश हैं।

एसओपी के तहत होगी उपायों की निगरानी

ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति से जुड़े उपायों की नियमित समीक्षा करने और अनुपालन रिपोर्ट संबंधित कार्यालय में जमा करने को कहा गया है। इसके लिए खंड विकास अधिकारी, सरपंच, ग्रामसेवक, जलापूर्ति एवं स्वच्छता समिति, जल सुरक्षा रक्षक, पुलिस पाटिल और संबंधित सरकारी कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इन सभी उपायों को शामिल करते हुए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर ग्राम पंचायतों तक पहुंचाने की योजना है। इसका उद्देश्य संकट पैदा होने के बाद कदम उठाने के बजाय पहले से तैयारी करके लोगों को नियमित पानी उपलब्ध कराना है।

कई तालुकों में भूजल स्तर में गिरावट

सितंबर 2026 के भूजल स्तर की तुलना पिछले पांच वर्षों के औसत से करने पर नागपुर जिले के कई तालुकों में गिरावट सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नागपुर तालुका में 1.52 मीटर, कामठी में 1.49 मीटर और हिंगणा में 1.44 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है।

नरखेड़ और सावनेर में 1.16 मीटर, जबकि पारशिवनी में 1.02 मीटर की गिरावट बताई गई है। रामटेक, काटोल, कलमेश्वर, मौदा, उमरेड, कुही और भिवापुर में भी पिछले पांच वर्षों के औसत की तुलना में भूजल स्तर कम होने का उल्लेख है।

भूजल स्तर में गिरावट का असर खेती, पीने के पानी की उपलब्धता और कुओं के जलस्तर पर पड़ सकता है। बारिश की मात्रा और उसका भौगोलिक वितरण, भूजल का पुनर्भरण तथा पानी का बढ़ता दोहन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

जल संरक्षण पर जोर देने की जरूरत

विशेषज्ञों के अनुसार, भूजल की गिरावट रोकने के लिए वर्षा जल को जमीन में उतारने, जल संरक्षण के कामों को गति देने और भूजल का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने की जरूरत है। नागपुर जिला परिषद ने भी उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तालुकावार स्थिति का आकलन कर संभावित जल संकट से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब इन उपायों को ग्राम पंचायत स्तर पर लागू करना और उनकी नियमित निगरानी करना महत्वपूर्ण होगा।

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