दशहरा रैली में शिंदे ने सूखा प्रभावित किसानों की मदद का मुद्दा उठाया। उन्होंने 5 हजार रुपये की तत्काल सहायता और 32 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी योजना का भी जिक्र किया।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 20 अक्टूबर। गोरेगांव के नेस्को सेंटर में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दशहरा सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किसानों की समस्याओं और सूखे के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि राज्य में किसान संकट से जूझ रहे हैं और यह समय आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय उनकी मदद के लिए आगे आने का है।
‘किसानों की दिवाली काली नहीं होने देंगे’
एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं और पार्टी अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के किसान संकट में हैं और राज्य पर सूखे का साया है। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
शिंदे ने कहा, “हम किसानों की दिवाली काली नहीं होने देंगे। हम खेतों की मेड़ तक पहुंचे, जहां किसान रो रहे थे। हम भाषण देने वाले नहीं, बल्कि राशन देने वाले हैं।”
उन्होंने कहा कि वह किसान के बेटे हैं और किसानों का दर्द समझते हैं। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने नियमों में छूट देकर भी किसानों की मदद की थी। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के बच्चों की पढ़ाई और शादी की जिम्मेदारी निभाने के लिए शिवसेना उनके साथ खड़ी है।
5 हजार रुपये की मदद और कर्जमाफी का जिक्र
शिंदे ने किसानों को दी जा रही सहायता पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए कहा कि 5 हजार रुपये की राशि तत्काल राहत के तौर पर दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूछ रहे हैं कि 5 हजार रुपये से क्या होगा, लेकिन यह संकट के समय दी जाने वाली शुरुआती मदद है।
उन्होंने दावा किया कि किसानों की कर्जमाफी के लिए 32 हजार करोड़ रुपये की योजना बनाई गई है। शिंदे ने कहा कि उनकी सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनकी मदद के लिए कदम उठा रही है।
उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए शिंदे ने सवाल किया कि क्या उन्होंने कभी संकट में फंसे किसानों को बिस्कुट का पैकेट तक दिया है? उन्होंने आरोप लगाया कि किसान संकट में हैं, लेकिन विपक्ष उनकी मदद करने के बजाय मोर्चे निकाल रहा है।
2019 के चुनाव को लेकर उद्धव ठाकरे पर हमला
एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर राजनीतिक हमला बोलते हुए 2019 के विधानसभा चुनाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के साथ चुनाव लड़ने के बाद उद्धव ठाकरे ने महाविकास आघाड़ी के साथ सरकार बनाई, जो मतदाताओं के विश्वास के साथ धोखा था।
शिंदे ने इसे उस समय की सबसे बड़ी ‘वोट चोरी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि विरोधियों की आलोचनाओं का जवाब वह आरोपों से नहीं, बल्कि अपने काम से देंगे।
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