बारिश में 20.50 प्रतिशत कमी, राज्य में 77 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
मुंबई, 28 सितंबर। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक एवं नेता रोहित पवार ने कहा कि राज्य सरकार ने महाराष्ट्र में सूखा घोषित कर दिया है, लेकिन अभी तक किसानों के लिए कोई ठोस आर्थिक सहायता घोषित नहीं की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि किसानों को कितनी सहायता दी जाएगी। इसके कारण किसानों में असमंजस और बेचैनी है।
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रोहित पवार ने कहा कि शरद पवार ने राज्य के किसानों और सूखे की स्थिति को लेकर पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें की हैं और पूरे राज्य का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं।
रोहित पवार ने कहा कि आगामी मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार किसानों के लिए कोई ठोस योजना और सहायता घोषित करेगी, ऐसी उम्मीद है। अगले सप्ताह भी मंत्रिमंडल की बैठक होने वाली है। यदि इन दोनों बैठकों में किसानों के लिए सहायता घोषित नहीं की गई, तो 12 से 15 अक्टूबर के बीच किसान और खेत मजदूर समृद्धि महामार्ग को रोकेंगे।
बारिश में 20.50 प्रतिशत की कमी
रोहित पवार के अनुसार, 27 सितंबर तक राज्य में 783.6 मिलीमीटर बारिश हुई है और बारिश में 20.50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। नासिक संभाग में 34.30 प्रतिशत, कोंकण संभाग में 9.80 प्रतिशत और नागपुर संभाग में 25 प्रतिशत बारिश की कमी रही है।
उन्होंने दावा किया कि किसानों ने बुआई के लिए करीब 95,500 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि 1 लाख 28 हजार 866 करोड़ रुपये के उत्पादन की उम्मीद थी। बारिश की कमी के कारण यह उत्पादन प्रभावित हुआ है। मराठवाड़ा में सोयाबीन, कपास, तूर और मक्का फसलों के लिए 33,750 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। पूरे विदर्भ में 22,456 करोड़ रुपये, जबकि अकेले यवतमाल जिले में 5,136 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया है। उत्तर महाराष्ट्र में 10 हजार करोड़ और अहिल्यानगर जिले में 3,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान उन्होंने बताया। उनके अनुसार, पूरे महाराष्ट्र में कुल 77 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें फल फसलों और गन्ने का नुकसान शामिल नहीं है। रबी सीजन में भी 35 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा उन्होंने किया।
हेक्टेयर 50 हजार रुपये की सीधी मदद की मांग
रोहित पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सरसकट यानी सभी प्रभावित किसानों को मदद देने की बात कही है। इसलिए सरकार को खेतों में हुए नुकसान के आधार पर किसानों को व्यापक स्तर पर सहायता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में कीटनाशकों की कीमतों में वृद्धि हुई है और बीजों को लेकर 17 हजार शिकायतें सामने आई हैं।
उन्होंने सरकार द्वारा सूखे के नाम पर घोषित राहत उपायों पर भी सवाल उठाए। इनमें जमीन के राजस्व में छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन, कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत, स्कूली और कॉलेज विद्यार्थियों को परीक्षा शुल्क में छूट, रोजगार गारंटी योजना के नियमों में ढील, किसानों एवं खेत मजदूरों को अनाज उपलब्ध कराने, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और जलसंधारण के कार्य शामिल हैं।
पवार ने कहा कि SDRF के नियमों के अनुसार वर्षा आधारित खेती के लिए हेक्टेयर 8,500 रुपये और अधिकतम 17 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। लेकिन जब किसान एक एकड़ में 50 से 60 हजार रुपये खर्च करता है, तो यह सहायता पर्याप्त नहीं है। उन्होंने हेक्टेयर कम से कम 50 हजार रुपये की सीधी आर्थिक सहायता देने की मांग की।
फसल बीमा की राशि पर भी सवाल
पत्रकार वार्ता के दौरान रोहित पवार ने जालना के एक किसान से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की। किसान ने बताया कि उसे फसल बीमा की राशि नहीं मिली है। पूछताछ करने पर बीमा बंद होने की जानकारी दी गई तथा इस वर्ष नुकसान का जायजा लेने कोई अधिकारी भी खेत पर नहीं आया।
इस पर रोहित पवार ने दावा किया कि किसानों, केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर बीमा कंपनियों को 2,394 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया, लेकिन किसानों को नुकसान भरपाई के रूप में केवल 1,938 करोड़ रुपये मिले। उन्होंने कहा, “भरे गए प्रीमियम जितने पैसे भी किसानों को वापस नहीं मिले।”
उन्होंने दावा किया कि किसानों को हेक्टेयर केवल 4,306 रुपये मिले, जबकि 17 हजार रुपये की मांग की गई थी। इसके अलावा कृषि समृद्धि योजना के पिछले तीन वर्षों के 15 हजार करोड़ रुपये अभी तक नहीं दिए जाने का आरोप भी उन्होंने लगाया।
रोहित पवार ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा 31,628 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाए जाने के बावजूद उसमें से केवल 25 प्रतिशत राशि ही किसानों तक पहुंची है।
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