लालबाग के राजा के प्रसाद के गीले कचरे से बनेगी अस्पतालों के लिए बिजली

रीमा सिंह

मुंबई,11 सितंबर।

गणेशोत्सव के दौरान निकलने वाले गीले कचरे का वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से प्रबंधन करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने लालबाग के राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल के सहयोग से अभिनव ‘प्रसाद से ऊर्जा’ पहल शुरू की है। इस योजना के तहत मंडल के प्रसाद कक्ष और अन्नछत्र से निकलने वाले गीले कचरे पर बायोमिथेनेशन प्रक्रिया के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से प्रक्रिया की जाएगी। इससे तैयार होने वाली नवीकरणीय बिजली का उपयोग महानगरपालिका के अस्पतालों में किया जाएगा।

गणेशोत्सव के दौरान प्रसाद वितरण और भोजन व्यवस्था से प्रतिदिन करीब 8 से 10 मीट्रिक टन खाद्य एवं जैविक कचरा निकलने का अनुमान है। इस कचरे को स्रोत पर ही उचित तरीके से अलग किया जाएगा। इसके बाद समर्पित वाहनों के माध्यम से इसे महानगरपालिका के नायर अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल, जीटीबी अस्पताल और सायन अस्पताल में स्थापित बायोमिथेनेशन संयंत्रों तक पहुंचाया जाएगा।

11 दिनों में 80 टन कचरे पर होगी प्रक्रिया

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प्रत्येक बायोमिथेनेशन संयंत्र की क्षमता करीब 2 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। इस पहल के तहत 11 दिनों में करीब 80 मीट्रिक टन गीले कचरे पर प्रक्रिया करने की योजना है। इससे लगभग 7,744 यूनिट नवीकरणीय बिजली पैदा होने का अनुमान है। हालांकि, वास्तविक बिजली उत्पादन अलग किए गए कचरे की मात्रा और गुणवत्ता तथा संयंत्रों की कार्यक्षमता पर निर्भर करेगा।

अस्पतालों में होगी बिजली का उपयोग

बायोमिथेनेशन से उत्पन्न बिजली का उपयोग अस्पतालों के रोगी कक्षों, गलियारों और अन्य साझा परिसरों की प्रकाश व्यवस्था सहित उपयुक्त कार्यों के लिए किया जाएगा।

यह पहल उप आयुक्त (परिमंडल-2) और उप आयुक्त (ठोस कचरा प्रबंधन) के निर्देश तथा एफ/दक्षिण विभाग के सहायक आयुक्त की पहल पर लागू की जा रही है। बीएमसी द्वारा नियुक्त मेसर्स एरोकेयर एविएशन प्राइवेट लिमिटेड इन बायोमिथेनेशन संयंत्रों के संचालन और रखरखाव का कार्य कर रही है।

कचरे से ऊर्जा निर्माण को मिलेगा बढ़ावा

बीएमसी के अनुसार, इस पहल से यह संदेश जाएगा कि बड़े सार्वजनिक उत्सवों से निकलने वाले गीले कचरे का उचित पृथक्करण और वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए उपयोगी ऊर्जा में रूपांतरण किया जा सकता है। इससे पारंपरिक कचरा निपटान व्यवस्था पर दबाव कम होगा और चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) की अवधारणा को भी बढ़ावा मिलेगा।

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