14 फीट से ऊंचे मकानों पर कार्रवाई से पहले क्या होगा पुनर्वास? मुंबई में सियासत तेज, कांग्रेस-यूबीटी ने उठाए सवाल

राहुल गुप्ता
मुंबई, 28 सितंबर। मुंबई में 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली झोपड़ियों और अनधिकृत निर्माणों पर प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। बीएमसी ने शहर में ऐसी करीब 39,111 संरचनाओं की पहचान की है और 1 अक्टूबर से तीन महीने का विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है।

इस कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा अब केंद्र में आ गया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के नेताओं ने मांग की है कि जिन लोगों के घर कार्रवाई की जद में आएं, उनके लिए पहले वैकल्पिक आवास या पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

पुनर्वास के बाद कार्रवाई की मांग

कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने बीएमसी के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और पुनर्विकास की व्यवस्था स्पष्ट की जाए। कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर बीएमसी आयुक्त से मुलाकात की भी पहल की गई है।

कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी निर्माण पर कार्रवाई जरूरी है तो वहां रहने वाले परिवारों के लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। पार्टी ने पुनर्विकास के तहत प्रभावित लोगों को बसाने की मांग उठाई है।

गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों में चिंता

शिवसेना (यूबीटी) समेत विभिन्न दलों के नगरसेवकों ने भी 14 फीट की सीमा और प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) के नगरसेवक यशोधर फणसे ने कहा कि कार्रवाई की जद में आने वाले लोगों के लिए मुंबई में वैकल्पिक आवास की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। कई नगरसेवकों ने यह भी सवाल उठाया है कि 14 फीट की सीमा तय करने का आधार क्या है।

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विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे अवैध निर्माण का समर्थन नहीं करते, लेकिन कार्रवाई के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के सामने आवास का संकट पैदा नहीं होना चाहिए।

बीएमसी का तीन महीने का अभियान

बीएमसी ने 19 सितंबर को घोषणा की थी कि 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक झुग्गी इलाकों में अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत 14 फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाली संरचनाओं को कार्रवाई के लिए चिन्हित किया गया है। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार मुंबई में करीब 2.23 लाख झोपड़ियां हैं, जिनमें से 39,111 संरचनाएं 14 फीट या उससे अधिक ऊंची हैं।

बीएमसी का अभियान अनधिकृत निर्माण और बाद में किए गए अवैध विस्तार को हटाने के उद्देश्य से बताया गया है।

मेयर रितु तावड़े ने क्या कहा?

इस पूरे विवाद के बीच मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने कहा है कि इस मामले पर बीएमसी सदन में उनके नेता विस्तार से जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार लोगों के घर बचाने के लिए है, उन्हें तोड़ने के लिए नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करने का विरोध किया जाएगा।

हालांकि, इससे पहले रितु तावड़े ने 14 फीट से ऊंची झोपड़ियों पर कार्रवाई के फैसले से अनभिज्ञता जताई थी, जिससे बीएमसी प्रशासन और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल उठे थे।

अब सबसे बड़ा सवाल पुनर्वास का

बीएमसी की कार्रवाई शुरू होने से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन परिवारों के घर इस अभियान की चपेट में आएंगे, उनके लिए पुनर्वास या वैकल्पिक आवास की क्या व्यवस्था होगी। बीएमसी के फैसले पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं और कई जनप्रतिनिधि कार्रवाई पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।

1 अक्टूबर से प्रस्तावित अभियान के बीच अब नजर इस बात पर होगी कि बीएमसी कार्रवाई के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर क्या व्यवस्था सामने रखती है।

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