बैलेट पेपर हो या ईवीएम, जनता को कांग्रेस पर भरोसा नहीं: भाजपा

भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता ने कांग्रेस पर साधा निशाना, महायुति में बेहतर समन्वय की कमी को पुणे की हार की वजह बताया

न्यूज़म ब्यूरो

मुंबई, 29 अक्टूबर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव बैलेट पेपर से हों या ईवीएम से, जनता का कांग्रेस पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में कांग्रेस को 28 सीटों में से केवल एक सीट पर सफलता मिली, वह भी दूसरी वरीयता के मतों के आधार पर। बन गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में बोल रहे थे।

बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर कांग्रेस को घेरा

नवनाथ बन ने कहा कि राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और संजय राउत सहित विपक्ष के कई नेता बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे थे। लेकिन बैलेट पेपर से हुए स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में भी कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव परिणाम स्वीकार कर जनता के बीच जाकर काम करना चाहिए, न कि बार-बार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठानी चाहिए।

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बन के अनुसार, ईवीएम और बैलेट पेपर दोनों माध्यमों से हुए चुनावों में इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन कमजोर रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है।

महायुति में समन्वय की कमी से पुणे में नुकसान का दावा

महाराष्ट्र के चुनाव परिणामों पर टिप्पणी करते हुए बन ने कहा कि महायुति के घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय होता, तो पुणे की सीट भाजपा जीत सकती थी और छत्रपति संभाजीनगर की सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को मिल सकती थी।

उन्होंने बताया कि पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना के आधिकारिक उम्मीदवार मंगेश चिवटे का नामांकन दाखिल किया गया था, लेकिन बाद में उनका एबी फॉर्म वापस ले लिया गया। इसके बाद महायुति के सभी घटक दलों के मिलकर चुनाव लड़ने की उम्मीद थी। हालांकि, अंतिम समय में शिवसेना ने सचिन सानप को समर्थन दे दिया।

बन के मुताबिक, सचिन सानप को लगभग 16 हजार वोट मिले, जबकि पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की उम्मीदवार स्मिता जाधव लगभग 11 से 12 हजार मतों के अंतर से हार गईं।

निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन देने पर उठाए सवाल

नवनाथ बन ने कहा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता स्नातक होने के कारण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी मतदान करते हैं। उनके अनुसार, यदि सचिन सानप को मिले 15 से 16 हजार वोट भाजपा उम्मीदवार स्मिता जाधव को मिले होते, तो वह पहले ही दौर में जीत सकती थीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना ने ऐसी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया, जहां उसका कोई आधिकारिक उम्मीदवार नहीं था। बन ने इसे महायुति के लिए नुकसानदायक बताते हुए कहा कि इस फैसले के कारण पुणे में गठबंधन को दो सीटों में से एक सीट गंवानी पड़ी।

छत्रपति संभाजीनगर में भी सहयोगी दल पर आरोप

बन ने छत्रपति संभाजीनगर के चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने सतीश चव्हाण को फिर से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार ने सतीश चव्हाण के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट किया और वहां भी सहयोगी दल की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा।

रविंद्र धंगेकर के खिलाफ कार्रवाई की मांग

भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता ने पुणे में शिवसेना के महानगर प्रमुख रविंद्र धंगेकर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि धंगेकर ने पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार को वोट नहीं देने की अपील की थी।

बन ने कहा कि पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में किसी उम्मीदवार को समर्थन देना शिवसेना का निर्णय हो सकता है, लेकिन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना का कोई उम्मीदवार नहीं होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ भूमिका अपनाना गंभीर मामला है। उन्होंने धंगेकर की चुनाव परिणाम के बाद की सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर लिखा था, “शाबाश स्नातक मतदाताओं!”, का भी उल्लेख किया।

एकनाथ शिंदे से कार्रवाई करने की मांग

नवनाथ बन ने कहा कि महायुति के घटक दलों को गठबंधन धर्म का पालन करना चाहिए। उन्होंने अमरावती के चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की मदद भाजपा ने की थी। उस चुनाव में बगावत करने की कोशिश करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने छह साल के निलंबन की कार्रवाई की थी।

बन ने मांग की कि यदि रविंद्र धंगेकर ने भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम किया है, तो शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि, धंगेकर और शिवसेना की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया इस बयान में शामिल नहीं है।

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