एल नीनो के प्रभाव और उत्पादन में संभावित गिरावट के बीच निजी व्यापारी अच्छे कपास के लिए ₹10,000 प्रति क्विंटल तक भाव दे रहे हैं।
राहुल गुप्ता
महाराष्ट्र, 17 अक्टूबर। पिछले कुछ वर्षों से कपास के बेहतर भाव का इंतजार कर रहे किसानों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। बारिश में लंबे अंतराल और एल नीनो के प्रभाव से इस साल कपास उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच खुले बाजार में अच्छे गुणवत्ता वाले कपास को निजी व्यापारियों से ₹10,000 प्रति क्विंटल तक भाव मिल रहा है। ऐसे में किसानों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में कपास की कीमतें और कितना उछाल लेंगी।
जानकारी के मुताबिक, खुले बाजार में 2021 में कपास का भाव पहली बार ₹10,000 प्रति क्विंटल के पार पहुंचा था। इसके बाद 2022 में कीमतों ने ₹13,500 प्रति क्विंटल का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उस समय मिले अच्छे भाव से किसानों को बड़ी राहत मिली थी। हालांकि, इसके बाद तीन वर्षों तक कपास की कीमतों में गिरावट और उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कई बार भाव ₹8,500 प्रति क्विंटल के पार पहुंचना भी मुश्किल हो गया था। अब कीमतें फिर ₹10,000 तक पहुंचने से किसानों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
उत्पादन घटने से बढ़ सकते हैं भाव
बारिश में लंबे अंतराल का असर कपास की बढ़वार, टिंडे बनने और अंतिम उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। एल नीनो के कारण बारिश का वितरण प्रभावित होने पर कुछ क्षेत्रों में उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। यदि उत्पादन कम होता है, तो बाजार में कपास की आवक घट सकती है, जिससे कीमतों को सहारा मिलने की संभावना है। ऐसे में इस सीजन में बारिश की स्थिति और वास्तविक उत्पादन कपास के भाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
जिनिंग उद्योग की मांग से मिल सकता है सहारा
कपास की कीमतों पर स्थानीय जिनिंग उद्योग की मांग का भी असर पड़ता है। जिनिंग कारखानों में कपास से रुई और बिनौला अलग किया जाता है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में कच्चे कपास की जरूरत होती है। उत्पादन घटने से कच्चे माल की उपलब्धता कम हुई, तो खरीद के लिए व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे बाजार भाव में और सुधार की संभावना बन सकती है। हालांकि, रुई की मांग के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित करेगी।
निजी व्यापारियों ने बढ़ाई खरीदारी
बाजार में तेजी के संकेत मिलने के बाद निजी व्यापारियों ने किसानों से सीधे कपास खरीदने की गतिविधियां तेज कर दी हैं। पिछले तीन-चार वर्षों की तुलना में मौजूदा भाव बेहतर होने से किसानों को राहत मिली है। कुछ किसान आगे और कीमतें बढ़ने की उम्मीद में फिलहाल बिक्री को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।
हालांकि, कपास की गुणवत्ता, उसमें नमी और स्थानीय बाजार की मांग के आधार पर वास्तविक खरीद भाव अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसानों के लिए बिक्री से पहले अलग-अलग व्यापारियों के भाव की तुलना करना फायदेमंद रहेगा।
क्या फिर ₹13,000 के पार पहुंचेगा कपास?
यदि उत्पादन में संभावित गिरावट, बाजार में कम आवक और जिनिंग उद्योग की मांग जैसे कारक अनुकूल रहते हैं, तो कपास का भाव ₹13,000 प्रति क्विंटल या उससे ऊपर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस स्तर तक कीमत पहुंचने की कोई गारंटी नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव, रुई की मांग और देश में कपास के वास्तविक उत्पादन से आगे की दिशा तय होगी। फिलहाल बाजार में तेजी के संकेतों ने किसानों को बेहतर आमदनी की उम्मीद दी है। ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की गतिविधियों पर नजर रखें और भाव, गुणवत्ता तथा अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर बिक्री का फैसला करें।
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