गोकुळ दूध संघ की कमान अमूल के हाथों में जाएगी? सतेज पाटील ने जताई आशंका

गोकुळ चुनाव के बीच अमूल के विस्तार को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। सतेज पाटील ने स्थानीय दूध संघ के अस्तित्व पर चिंता जताई।

राहुल गुप्ता

कोल्हापुर, 15 अक्टूबर। गोकुळ दूध संघ के चुनाव को लेकर महाराष्ट्र में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस विधायक सतेज पाटील ने आशंका जताई है कि यदि विरोधी दलों की सत्ता आती है, तो गोकुळ दूध संघ भी अमूल के नियंत्रण में जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात मिल्क फेडरेशन दूसरे राज्यों के स्थानीय दूध संघों को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहा है।

गोकुळ दूध संघ के चुनाव प्रचार के दौरान समविचारी आघाड़ी का पक्ष रखते हुए पाटील ने कहा कि अमूल और गुजरात मिल्क फेडरेशन स्थानीय दूध संघों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का सपना दिखाते हैं, लेकिन इससे स्थानीय संस्थाओं का अस्तित्व कमजोर होने का खतरा है।

कर्नाटक से तमिलनाडु तक अमूल के विस्तार पर सवाल

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सतेज पाटील ने दावा किया कि कर्नाटक के नंदिनी दूध संघ को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिशों के बाद वहां ‘नंदिनी बचाओ’ अभियान चलाया गया था। उन्होंने मध्य प्रदेश के सांची दूध संघ का भी उल्लेख किया, जहां उनके मुताबिक, प्रतिदिन 10 लाख लीटर दूध एकत्र करने वाले संघ को अपने नियंत्रण में लेने के प्रयासों का विरोध हुआ।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में भी इसी तरह की कोशिश हुई थी, लेकिन मुख्यमंत्री के विरोध के कारण मामला आगे नहीं बढ़ा। पाटील ने महाराष्ट्र के महानंद दूध संघ का उदाहरण देते हुए कहा कि उसे राज्य के सक्षम दूध संघों के माध्यम से चलाया जा सकता था, लेकिन उसे राष्ट्रीय डेयरी महासंघ को सौंप दिया गया। उन्होंने आशंका जताई कि गोकुळ के मामले में भी ऐसा हो सकता है।

गोकुळ चुनाव में धार्मिक शपथ दिलाने पर विवाद

इस बीच, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सतीशचंद्र कांबळे ने गोकुळ चुनाव में मतदाताओं को धार्मिक शपथ दिलाने के कथित मामले पर महायुति के नेताओं की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि संत बालूमामा और हालसिद्धनाथ जैसे लाखों श्रद्धालुओं के आराध्य से जुड़े पवित्र भंडारे का इस्तेमाल चुनाव में समर्थन सुनिश्चित करने के लिए करना क्या उनकी आस्था का अपमान नहीं है।

कांबळे ने आरोप लगाया कि महायुति के नेता गोकुळ के ठरावधारकों यानी मतदान के लिए अधिकृत प्रतिनिधियों को अपने पैनल के पक्ष में वोट देने की शपथ दिला रहे हैं। उनके अनुसार, बालूमामा के भंडारे, चिक्कोडी तालुका के अप्पाचीवाड़ी स्थित श्री हालसिद्धनाथ के पवित्र भंडारे और राधानगरी की विठलाई देवी के अंगारे का इस्तेमाल कर प्रतिनिधियों पर दबाव बनाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ प्रतिनिधि धार्मिक आस्था और देवता के प्रकोप के डर से दबाव में आ सकते हैं। कांबळे ने कहा कि यदि पिछले पांच वर्षों में दूध उत्पादकों और सहकारी संस्थाओं के लिए अच्छा काम किया गया है, तो मतदाताओं पर भरोसा करने के बजाय उनसे शपथ क्यों दिलाई जा रही है।

अंधविश्वास विरोधी कानून का भी उठाया मुद्दा

कांबळे ने कहा कि कोल्हापुर जिला लंबे समय से प्रगतिशील विचारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नरेंद्र दाभोलकर के अंधविश्वास विरोधी आंदोलन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि गोकुळ चुनाव में धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने इस पूरे मामले को सत्ता हासिल करने के लिए धार्मिक आस्था के इस्तेमाल का आरोप बताते हुए इसकी आलोचना की। हालांकि, शपथ दिलाने और प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने से जुड़े ये आरोप कांबळे के बयान पर आधारित हैं।

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