गणपति उत्सव में डीजे बजाया तो फंसेंगे? हाईकोर्ट ने तय की ₹1 लाख की सुरक्षा राशि

मुंबई हाईकोर्ट ने गणेशोत्सव समेत धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती दिखाई; नियम तोड़ने पर मंडलों की सुरक्षा राशि जब्त करने का निर्देश

राहुल गुप्ता

मुंबई, 25 सितंबर। गणेशोत्सव और अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ध्वनि प्रदूषण को लेकर मुंबई हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत के निर्देश के मुताबिक लाउडस्पीकर या ध्वनिक्षेपक इस्तेमाल करने की अनुमति लेने वाले सार्वजनिक मंडलों को ₹1 लाख की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। वहीं, निजी स्तर पर लाउडस्पीकर या साउंड सिस्टम इस्तेमाल करने की अनुमति मांगने वालों के लिए ₹50 हजार की सुरक्षा राशि तय की गई है।

नियम तोड़ा तो जब्त हो सकती है सुरक्षा राशि

हाईकोर्ट ने कहा है कि लाउडस्पीकर इस्तेमाल की अनुमति देते समय प्रशासन को ध्वनि की निर्धारित सीमा समेत जरूरी शर्तें स्पष्ट करनी होंगी। आयोजकों के लिए इन शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

यदि कोई मंडल या व्यक्ति निर्धारित ध्वनि सीमा का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो जमा की गई सुरक्षा राशि जब्त की जा सकती है। इसके अलावा संबंधित आयोजक के खिलाफ ध्वनि प्रदूषण से जुड़े लागू नियमों के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।

Advertisement

साउंड लिमिटर और डेसिबल मीटर लगाना जरूरी

अदालत ने ध्वनि की निगरानी के लिए तकनीकी उपायों पर भी जोर दिया है। निर्देशों के अनुसार उत्सव स्थलों और जुलूसों में आंतरिक साउंड लिमिटर और डेसिबल मीटर लगाने की व्यवस्था की जानी है, ताकि ध्वनि की सीमा पर नजर रखी जा सके।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जुलूस या कार्यक्रम के दौरान लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने की अनुमति को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। अनुमति प्रदर्शित नहीं होने पर ध्वनिक्षेपक के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी।

डीजे, लेजर लाइट और पटाखों पर भी सख्ती

22 सितंबर के आदेश के तहत सार्वजनिक सड़कों और रास्तों पर उत्सव के दौरान पटाखे फोड़ने पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही लेजर लाइट, हाई-इंटेंसिटी ल्यूमेन लाइट और बीम के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

गणपति विसर्जन से पहले बढ़ी प्रशासन की जिम्मेदारी

गणपति विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में गणेश मंडलों और श्रद्धालुओं के जुटने को देखते हुए इन निर्देशों का पालन कराना पुलिस और प्रशासन के लिए अहम होगा। हाईकोर्ट ने पहले भी सवाल उठाया था कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम लागू होने के बावजूद उनके उल्लंघन की शिकायतें लगातार क्यों सामने आती हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को रोकना उद्देश्य नहीं है, बल्कि मौजूदा कानूनों और निर्धारित ध्वनि सीमाओं का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।

पढ़ने के लिए धन्यवाद

आपका समय और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अगर यह खबर आपके लिए उपयोगी रही, तो हमसे जुड़े रहें — हर ज़रूरी खबर के लिए Newsam को फ़ॉलो करें।

Add a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
↑
Tap to Refresh