महाराष्ट्र के सबसे अमीर विधायक पराग शाह एक दिन बने भिखारी, सड़क पर मांगनी पड़ी भिक्षा

3400 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति वाले घाटकोपर ईस्ट के विधायक ने गुरु की सलाह पर भिखारी का वेश धारण किया, लोगों से भिक्षा मांगकर भोजन करने का अनुभव लिया

राहुल गुप्ता
मुंबई, 14 सितंबर।

महाराष्ट्र के सबसे अमीर विधायकों में शामिल पराग शाह का एक अलग तरह का सामाजिक और धार्मिक अनुभव चर्चा में है। करीब 3400 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति वाले घाटकोपर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र के विधायक पराग शाह ने एक दिन भिखारी का जीवन जीने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने मेकअप के जरिए भिखारी का रूप धारण किया और आम लोगों के बीच जाकर भिक्षा भी मांगी।

इस दौरान पराग शाह अपने नियमित सुरक्षा इंतजाम और अन्य संसाधनों से अलग रहे। वे आम लोगों की तरह सार्वजनिक स्थानों पर गए और कई जगहों पर लोगों से संपर्क किया। वेश बदलने की वजह से कई लोग उन्हें पहचान नहीं सके।

गुरु की सलाह पर अपनाया भिखारी का रूप

जानकारी के मुताबिक, जैन धर्म के चातुर्मास के दौरान पराग शाह के गुरु नम्रमुनि ने उन्हें एक दिन भिखारी के जीवन और उसकी परिस्थितियों को करीब से समझने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने इस अनुभव को लेने का फैसला किया।

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पराग शाह ने मेकअप के जरिए अपना रूप बदला और अलग-अलग स्थानों पर जाकर लोगों से भिक्षा मांगी। उन्होंने भिक्षा से भोजन प्राप्त करने का अनुभव भी लिया और आम लोगों के बीच रहकर भिखारी के जीवन की परिस्थितियों को समझने की कोशिश की।

असली पहचान बताकर लोगों से की बातचीत

बाद में कुछ स्थानों पर पराग शाह ने लोगों को अपनी वास्तविक पहचान बताई। इसके बाद उन्होंने दोबारा वहां जाकर लोगों से बातचीत की और एक दिन के इस अनुभव को साझा किया।

इस दौरान उनका मकसद समाज के उस वर्ग के जीवन और परिस्थितियों को करीब से समझना था, जिसके बारे में आम तौर पर लोग दूर से ही अनुमान लगाते हैं।

चर्चा का विषय बना विधायक का प्रयोग

पराग शाह घाटकोपर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और उनकी गिनती महाराष्ट्र के सबसे अमीर विधायकों में होती है। ऐसे में उनका भिखारी का वेश धारण कर सड़कों पर भिक्षा मांगना चर्चा का विषय बन गया है।

इस पहल को व्यक्तिगत और धार्मिक अनुभव के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस घटना ने यह सामाजिक सवाल भी खड़ा किया है कि किसी व्यक्ति के जीवन की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को केवल कुछ घंटों या एक दिन के अनुभव से किस हद तक समझा जा सकता है।

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