मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 से मिल रहा लाभ,शाम की अधिकतम मांग के समय मिलेगी सस्ती बिजली
न्यूज़म ब्यूरो
मुंबई, 29 अक्टूबर। महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) ने बैटरी के माध्यम से 1,000 मेगावाट-घंटे (MWh) बिजली की आपूर्ति करने की उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत सौर ऊर्जा से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली और ग्रिड के माध्यम से उपलब्ध सस्ती सौर ऊर्जा को बैटरी में संग्रहित कर शाम के समय बिजली की अधिकतम मांग के दौरान इस्तेमाल किया जा रहा है। देश में पहली बार विकेंद्रित स्तर पर बैटरी स्टोरेज प्रणाली के जरिए इतनी बड़ी मात्रा में बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति के कारण बढ़ी बिजली की मांग को पूरा करने में यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो रही है। यह जानकारी मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव तथा महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र ने दी।
मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 से मिल रहा लाभ
लोकेश चंद्र ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर राज्य में मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 लागू की जा रही है। इस योजना के तहत अब तक लगभग 7,000 मेगावाट क्षमता की विकेंद्रित सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली कृषि पंपों को दिन के समय उपलब्ध कराई जाती है।
इस दौरान बचने वाली अतिरिक्त बिजली को शाम के समय इस्तेमाल करने के लिए महावितरण ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) योजना शुरू की है। इसके तहत हाल ही में 500 मेगावाट क्षमता की बैटरी भंडारण व्यवस्था चालू की गई है। इससे दो घंटे तक बिजली आपूर्ति की जा सकती है, जिससे कुल 1,000 मेगावाट-घंटे की भंडारण एवं आपूर्ति क्षमता उपलब्ध हुई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर शुरू की गई इस योजना का लाभ सभी श्रेणियों के बिजली उपभोक्ताओं को मिल रहा है।
शाम की अधिकतम मांग के समय मिलेगी सस्ती बिजली
अल नीनो के प्रभाव के कारण बारिश कम होने और अक्टूबर में गर्मी बढ़ने से राज्य में बिजली की मांग उच्च स्तर पर पहुंच रही है। दिन के समय सौर ऊर्जा के कारण पर्याप्त बिजली अपेक्षाकृत कम दर पर उपलब्ध होती है। लेकिन शाम को सौर ऊर्जा का उत्पादन बंद होने के बाद मांग पूरी करने के लिए बाजार से अधिक कीमत पर बिजली खरीदनी पड़ती है।
ऐसे में महावितरण की बैटरी स्टोरेज व्यवस्था से दिन में उपलब्ध अतिरिक्त और सस्ती सौर ऊर्जा को संग्रहित करके शाम के समय इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बिजली की अधिकतम मांग के दौरान आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ ही महंगी बिजली खरीदने पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिलेगी।
1,500 मेगावाट-घंटे क्षमता का लक्ष्य
महावितरण ने कुल 750 मेगावाट क्षमता की बैटरी भंडारण परियोजनाएं स्थापित करने की योजना शुरू की है। इन परियोजनाओं के माध्यम से दो घंटे तक बिजली आपूर्ति करने पर कुल 1,500 मेगावाट-घंटे बिजली उपलब्ध हो सकेगी। इसमें से 1,000 मेगावाट-घंटे क्षमता का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष काम दिसंबर के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, 4,000 मेगावाट-घंटे क्षमता की अन्य बैटरी भंडारण परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के शुरू होने से शाम के समय बिजली की अधिकतम मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही बाजार की तुलना में किफायती दर पर बिजली उपलब्ध कराना संभव होगा। आगामी गर्मियों में इस व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
देश की पहली बिजली वितरण कंपनी बनी महावितरण
महावितरण देश की पहली बिजली वितरण कंपनी बन गई है, जिसने विकेंद्रित बिजली वितरण नेटवर्क से जुड़ी 1,000 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं शुरू की हैं। राज्य में कुल 50 स्थानों पर 10-10 मेगावाट क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजनाएं चालू की गई हैं।
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसके जरिए सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली को संग्रहित करके जरूरत के समय, विशेष रूप से शाम की अधिकतम मांग के दौरान, इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने और बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी।
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