पुणे में जहरीली शराब से 22 लोगों की मौत के बाद मिथेनॉल कंपनियों पर हुई कार्यवाही के बीच रांजणगांव की एक कंपनी को राहत मिली।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 27 अक्टूबर। पुणे में जहरीली शराब से 22 लोगों की मौत के बाद मिथेनॉल की नियमों के विरुद्ध बिक्री और भंडारण करने वाली कंपनियों पर की गई कार्यवाही को लेकर विवाद सामने आया है। अन्न एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के लाइसेंस रद्द और निलंबित किए गए थे। इनमें रांजणगांव औद्योगिक क्षेत्र की एक रसायन कंपनी भी शामिल थी। हालांकि, मंत्री नरहरि झिरवाल के समक्ष अपील के बाद कंपनी का लाइसेंस बहाल कर दिया गया। इस फैसले को लेकर राजनीतिक दबाव के आरोप लगाए जा रहे हैं।
102 कंपनियों की हुई थी जांच
पुणे में जहरीली शराब की घटना में 22 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की थी। राज्य आबकारी विभाग के 13 अधिकारियों और 9 पुलिसकर्मियों को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया था। मामले के मुख्य आरोपियों समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
इसके बाद अन्न एवं औषधि प्रशासन ने पुणे संभाग में मिथेनॉल से जुड़ी 102 कंपनियों का निरीक्षण किया। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 15 कंपनियों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए गए, जबकि 28 कंपनियों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। रांजणगांव औद्योगिक क्षेत्र की एक रसायन कंपनी भी इस कार्यवाही की जद में आई थी।
अपील के बाद कंपनी का लाइसेंस बहाल
रिपोर्ट के अनुसार, रांजणगांव की कंपनी ने मंत्री नरहरि झिरवाल के समक्ष अपील दायर की थी। 9 सितंबर को सुनवाई के बाद मंत्री ने कंपनी के खिलाफ की गई कार्यवाही पर रोक लगाते हुए उसका लाइसेंस फिर से बहाल कर दिया।
इस फैसले के बाद आरोप लगाए जा रहे हैं कि अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की सिफारिश पर कंपनी को राहत मिली। हालांकि, संबंधित नेता का नाम सामने नहीं आया है और दबाव डालने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मंत्री ने क्या कहा?
मंत्री नरहरि झिरवाल ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अपीलकर्ता की ओर से पेश किए गए सबूतों और तथ्यों पर विचार करने के बाद उन्होंने अपनी सदसदविवेकबुद्धि के आधार पर निर्णय लिया।
इस मामले में सवाल उठ रहे हैं कि नियमों के उल्लंघन के कारण जिस कंपनी का लाइसेंस रद्द या निलंबित किया गया था, उसे अपील के बाद किन आधारों पर दोबारा बहाल किया गया। फिलहाल, कंपनी को राहत देने के फैसले और कथित राजनीतिक सिफारिश को लेकर विवाद जारी है।
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