आने वाले दिनों में जलसंकट की आशंका के बीच नगर निगम के हाइड्रेंट से निजी टैंकरों को रोजाना पानी दिया जा रहा है, लेकिन उसके इस्तेमाल का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है।
राहुल गुप्ता
अकोला, 27 अक्टूबर। शहर में पानी की किल्लत बढ़ने की आशंका के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। काटेपूर्णा बांध में अब केवल 14.20 प्रतिशत जलसंग्रह बचा है। ऐसे में नागरिकों से पानी की हर बूंद बचाने की अपील की जा रही है, लेकिन दूसरी ओर सिटी कोतवाली चौक स्थित नगर निगम के हाइड्रेंट से निजी टैंकरों में रोजाना हजारों लीटर पानी भरा जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम के हाइड्रेंट से महज 100 रुपये में 5,000 लीटर पानी दिया जा रहा है। हालांकि, इस पानी का इस्तेमाल कहां और किस काम के लिए हो रहा है, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड जलापूर्ति विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
पानी कहां इस्तेमाल हो रहा है, विभाग को जानकारी नहीं
शहर में नगर निगम के हाइड्रेंट से पानी भरकर निकलने वाले निजी टैंकर रोजाना दिखाई देते हैं। लेकिन प्रशासन के पास इस बात की ठोस जानकारी नहीं है कि टैंकरों से पहुंचाया जा रहा पानी घरेलू जरूरतों के लिए इस्तेमाल हो रहा है या निर्माण कार्यों, सड़क निर्माण और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में खपाया जा रहा है।
पानी भरने के बाद प्रत्येक टैंकर को नियमानुसार रसीद दी जाती है या नहीं, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पानी की बिक्री जारी रहने के बावजूद उसके वितरण, इस्तेमाल और हिसाब-किताब पर प्रभावी निगरानी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
निजी हाइड्रेंट की संख्या भी दर्ज नहीं
नगर निगम के जलापूर्ति विभाग के अभियंता अमोल डोईफोडे के अनुसार, विभाग के पास शहर में निजी हाइड्रेंट की संख्या का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी टैंकरों से नागरिकों की जरूरतें पूरी की जा रही हों तो कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, पानी का इस्तेमाल अन्य कामों में होने पर नजर रखने के निर्देश नगर निगम आयुक्त ने क्षेत्रीय अधिकारियों को दिए हैं।
10 टैंकरों से नगर निगम भी कर रहा जलापूर्ति
जलसंकट की आशंका के बीच नगर निगम और निजी हाइड्रेंट से पानी की बिक्री तथा उसके इस्तेमाल पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभाग के पास निजी हाइड्रेंट की संख्या का रिकॉर्ड नहीं होने से निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
नगर निगम की ओर से भी 10 टैंकरों के जरिए नागरिकों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद शहर में पानी की समस्या के स्थायी समाधान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। बांध में सीमित जलसंग्रह को देखते हुए पानी के वितरण और इस्तेमाल पर निगरानी कितनी प्रभावी होगी, यह आने वाले दिनों में अहम रहेगा।
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