बढ़ती आबादी और औद्योगिक विस्तार के बीच मुंबई महानगर क्षेत्र की जल सुरक्षा के लिए 2031, 2041 और 2051 तक की मांग और उपलब्ध जल स्रोतों का आकलन किया जाएगा।
राहुल गुप्ता
मुंबई, 27 अक्टूबर। मुंबई महानगर क्षेत्र में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, आबादी और औद्योगिक विस्तार को देखते हुए राज्य सरकार ने वर्ष 2051 तक पानी की जरूरतों की योजना बनाने के लिए एक अध्ययन समूह गठित किया है। यह समूह मौजूदा और संभावित जल स्रोतों, भविष्य की मांग, पानी की संभावित कमी और वैकल्पिक स्रोतों का अध्ययन कर एकीकृत जल सुरक्षा योजना तैयार करेगा। शासन निर्णय जारी होने के तीन महीने के भीतर समूह को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी।
इस अध्ययन समूह की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त सचिव डॉ. संजय बेलसरे करेंगे। इसमें मुंबई महानगरपालिका, मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए), ठाणे, नवी मुंबई और कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका, महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल, महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन सेंटर और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
जल स्रोतों और पुनर्वापर की संभावनाओं का अध्ययन
समूह बांधों, जलाशयों, नदियों और भूजल सहित उपलब्ध जल स्रोतों की वास्तविक क्षमता का आकलन करेगा। मौजूदा जल स्रोतों पर किए गए आरक्षण और उनके वास्तविक इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए यह भी पता लगाया जाएगा कि भविष्य में अतिरिक्त पानी कहां से उपलब्ध हो सकता है। इसके साथ ही अपशिष्ट जल के पुनर्वापर और वैकल्पिक जल स्रोतों की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा।
तीन चरणों में तय होगी पानी की मांग
अध्ययन समूह को मुंबई महानगर क्षेत्र में घरेलू, औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और निर्माण क्षेत्र की पानी की जरूरतों का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत वर्ष 2031, 2041 और 2051 के लिए पानी की कुल मांग और उपलब्ध जल स्रोतों की क्षमता के बीच अंतर का अध्ययन किया जाएगा।
नगरपालिका, नगर परिषद, औद्योगिक क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में मौजूदा जलापूर्ति, आबादी, पानी की मांग, जल स्रोतों, जल आरक्षण और संभावित कमी से जुड़ी क्षेत्रवार जानकारी जुटाई जाएगी। पूरी हो चुकी, निर्माणाधीन, मंजूर और प्रस्तावित जलापूर्ति योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी।
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर भी नजर
अध्ययन में अतिवृष्टि, जल उपलब्धता में अनिश्चितता और समुद्र के जलस्तर में वृद्धि जैसे कारकों के जल स्रोतों तथा जलापूर्ति पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाएगा। बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी पानी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए जरूरी उपायों को योजना में शामिल किया जाएगा।
नई परियोजनाओं के लिए तय होगी प्राथमिकता
वर्ष 2031, 2041 और 2051 की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए जल स्रोतों, जलापूर्ति योजनाओं, वितरण व्यवस्था और पानी के पुनर्वापर से जुड़ी परियोजनाओं की पहचान की जाएगी। प्रस्तावित योजना में प्रत्येक परियोजना के लिए जरूरी धनराशि, कार्यान्वयन की समयसीमा और संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां भी तय की जाएंगी।
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